दिल्ली। कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) ने मंगलवार को कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर प्रस्ताव पारित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। पार्टी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को तत्काल निलंबित करने और मतदाता सूचियों से हटाए गए करीब 13 करोड़ 30 लाख नामों को दोबारा शामिल किए जाने की मांग भी उठाई।
इंदिरा भवन में करीब ढाई घंटे चली कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक की अध्यक्षता पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने की। बैठक में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, महासचिव प्रियंका गांधी सहित पार्टी के चार मुख्यमंत्रियों और कार्यसमिति के अन्य सदस्यों ने हिस्सा लिया।
‘वोट चोरी’ और SIR पर कांग्रेस का सरकार पर हमला
बैठक के बाद पत्रकार वार्ता में कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने कार्यसमिति के फैसलों की जानकारी दी।
वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि, चुनाव आयोग के माध्यम से भाजपा और आरएसएस ने चुनावी प्रक्रिया पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है। उनके मुताबिक, मोदी सरकार के इशारे पर SIR प्रक्रिया के जरिए देशभर की मतदाता सूचियों से करीब 13 करोड़ 30 लाख नाम हटाए गए हैं।
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग की। कांग्रेस महासचिव ने कहा कि पार्टी पिछले दो वर्षों से ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को उठा रही है और कार्यसमिति ने इस मुद्दे को लगातार उठाने के लिए राहुल गांधी को बधाई दी है।
बूथ स्तर तक आंदोलन ले जाने की तैयारी
कांग्रेस ने कहा कि पार्टी देश के 800 से अधिक जिलों और विभिन्न राज्यों में इस मुद्दे को लेकर आंदोलन कर चुकी है। अब इसे बूथ स्तर तक ले जाने की तैयारी है। वेणुगोपाल के अनुसार, पार्टी मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों तक पहुंचने का अभियान चलाएगी। उन्होंने कहा कि भविष्य के संयुक्त आंदोलन और विस्तृत रणनीति पर 30 सितंबर को होने वाली INDIA गठबंधन की बैठक में सहयोगी दलों के साथ चर्चा की जाएगी।
जयराम रमेश ने चुनाव प्रक्रिया पर उठाए सवाल
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि राहुल गांधी पिछले दो वर्षों से 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों में कथित वोट चोरी का मुद्दा उठा रहे हैं। रमेश ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस के अनुसार देश में होने वाले चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी नहीं रह गए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बीच ‘मैच फिक्सिंग’ का आरोप लगाया।
उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस की राजनीति केवल विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी ‘प्रतिरोध’ की राजनीति भी करेगी। उनके अनुसार, कांग्रेस संसद के भीतर विरोध और सड़कों पर आंदोलन जारी रखेगी।
खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग की
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कार्यसमिति की बैठक में अपने शुरुआती संबोधन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने की मांग की। खरगे ने आरोप लगाया कि, चुनावी प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त पर दबाव डाला गया और इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि हालिया घटनाक्रम में दोनों चुनाव आयुक्तों ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त की कुछ गतिविधियों को मनमाना और अनुचित बताया है।
कांग्रेस ने रखीं कई मांगें
कांग्रेस अध्यक्ष ने मतदाता सूची में होने वाले बड़े बदलावों को लेकर पारदर्शिता की मांग की। पार्टी की प्रमुख मांगों में शामिल हैं-
कांग्रेस के आरोपों पर चुनाव आयोग और सरकार का पक्ष भी महत्वपूर्ण
कांग्रेस द्वारा लगाए गए ये आरोप राजनीतिक रूप से गंभीर हैं। हालांकि, ‘13 करोड़ 30 लाख नाम अवैध रूप से हटाए गए’, चुनाव आयोग और सरकार की कथित मिलीभगत तथा चुनाव प्रक्रिया के ‘फिक्स’ होने जैसे दावों को कांग्रेस के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए, जब तक इनके समर्थन में स्वतंत्र और आधिकारिक प्रमाण उपलब्ध न हों।
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