इंदौर। हाल की स्वच्छ सर्वेक्षण रैंकिंग के आधार पर, 2025 में भारत का सबसे स्वच्छ शहर लगातार मध्य प्रदेश का इंदौर शहर माना जाता है। लेकिन इसी शहर के दूषित पानी पीने से 14 लोगों की मौत और 300 से अधिक लोग बीमार हो गए है। यह हाल है, इंदौर शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र का, जहां दूषित पानी पीने के बाद लोग उल्टी दस्त की चपेट में गए। वहीं, दूषित पानी पीकर बीमार हुए 300 के करीब मरीज शहर के अलग-अलग हॉस्पिटलों में उपचार के लिए भर्ती है।
फिलहाल, मोहन यादव सरकार ने इस मामले में लापरवाही बरतने के लिए 03 अफसरों को निलंबित कर दिया है और एक अधिकारी को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने हॉस्पिटलों में भर्ती मरीजों व उनके परिजन से हाल-चाल जाना है। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बताया जा रहा कि, भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी सप्लाई हो रहा था। इसकी पुष्टि CMHO डॉ. माधव हासानी खुद की है। उन्होंने कहा कि, MGM मेडिकल कॉलेज से मिली रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि, इलाके के पानी में गंदगी की मिलावट है।
लापरवाही के बाद मुआवजे का मलहम
मृतकों के परिजन को 2-2 लाख रुपए मुआवजे की घोषणा के बाद गुरुवार को मंत्री कैलाश विजयवर्गीय स्कूटर पर समर्थकों और क्षेत्रीय नेताओं के साथ घर-घर चेक देने पहुंचे तो परिजन के उग्र विरोध का सामना करना पड़ा। परिजन ने साफ कहा कि हमें आपका चेक नहीं चाहिए। लोगों ने कहा कि उन्हें जरूरत साफ पानी और अन्य मूलभूत सुविधाओं की हैं। लोगों ने पार्षद के रवैए को लेकर नाराजगी जताई।
मंत्री कैलाश को खदेड़ा, मीडिया को रोकने की कोशिश
वहीं, जब कैलाश विजयवर्गीय को देख स्थानीय लोगों ने देखा तो उनका गुस्सा भड़क गया। लोगों का कहना था कि, अब क्या करने आए हो? कल तक तो हमें मिलने बुला रहे थे। अब लौट जाओ। हमें तुम्हारी जरूरत नहीं है। दूषित पानी के कारण 6 महीने के बच्चे अव्यान की भी मौत हो गई, विजयवर्गीय उसके घर पहुंचे तो परिजन ने जमकर नाराजगी जाहिर की। विरोध के दौरान मंत्री समर्थकों ने कवरेज कर रहे मीडियाकर्मियों के कैमरे बंद कराने के प्रयास किए गए।
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