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विश्व हाथी दिवस पर विशेष: छत्तीसगढ़ में हाथी-मानव के बीच संघर्ष जारी, पिछले 23 वर्षों में लगभग 750 मौत, 90 घायल

 Newsbaji  |  Aug 12, 2025 09:01 AM  | 
Last Updated : Aug 12, 2025 09:01 AM
हाथी-मानव के बीच संघर्ष जारी है, जंगल से निकलकर हाथी बस्तियों की ओर रुख कर रहें।
हाथी-मानव के बीच संघर्ष जारी है, जंगल से निकलकर हाथी बस्तियों की ओर रुख कर रहें।

रायपुर। प्रत्येक वर्ष 12 अगस्त को विश्व हाथी दिवस मनाया जाता है। हाथियों को संरक्षण और सुरक्षा देने के उद्देश्य से साल 2012 से हाथी दिवस मनाया जाने लगा है। लेकिन आज भी हाथी-मानव के संघर्ष की घटनाएं सामने आती है, जिसमें छत्तीसगढ़, मध्य भारत का एक प्रमुख राज्य, अपनी प्राकृतिक समृद्धि और घने जंगलों के लिए अलग पहचान रखता है, लेकिन हाल के दशकों में यह राज्य हाथी-मानव संघर्ष का एक प्रमुख केंद्र बन गया है। यह संघर्ष न केवल वन्यजीव संरक्षण के लिए खतरा है, बल्कि स्थानीय समुदायों के लिए भी एक गंभीर सामाजिक-आर्थिक चुनौती बनकर उभर रहा है।

प्रदेश के 11 जिले हाथी प्रभावित  
छत्तीसगढ़ के कई जिले हाथी प्रभावित है। इनमें सरगुजा, जशपुर, कोरिया, कोरबा, सूरजपुर, बलरामपुर, गरियाबंद, महासमुंद, रायगढ़, सूरजपुर के साथ अब धमतरी और रायपुर भी इसमें शामिल हो गए है। इन क्षेत्रों में मानव हाथी द्वंद में कभी हाथियों तो कभी आम लोगों को जान माल का नुकसान होता रहता है।

हताहत और प्रभावित क्षेत्र
जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ में 2000 से 2023 के बीच 828 हाथी-मानव संघर्ष की घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें से 737 लोगों की मौत हुई, जबकि 90 से अधिक लोग घायल हुए। सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र जशपुर रहा, जहां 152 मौतें और 20 लोग घायल हुए। इसके बाद धरमजयगढ़ (135 मौतें, 20 घायल), सूरजपुर (107 मौतें, 4 घायल), और कोरबा (64 मौतें, 4 घायल) जैसे क्षेत्र शामिल हैं। कुल 321 गांव इस संघर्ष से प्रभावित हुए, जिनमें जशपुर में सबसे अधिक 66 गांव शामिल हैं। इसके बाद सूरजपुर (45 गांव), धरमजयगढ़ और बलरामपुर (प्रत्येक में 35 गांव) का स्थान है। 

संघर्ष के आंकड़ों से पता चलता है कि, मानसून के दौरान (जून से सितंबर) संघर्ष की घटनाएं सबसे अधिक हुई, जिसमें 205 पुरुषों और 117 महिलाओं की मौत या चोटें दर्ज की गईं। पुरुषों में हताहत की संख्या (540) महिलाओं (288) की तुलना में काफी अधिक रही। यह अंतर इसलिए है क्योंकि, पुरुष अधिकतर खेतों में काम करते हैं या रात में गांवों की रखवाली करते हैं, जिसके कारण पुरुष हाथियों के संपर्क में ज्यादा आते है।
 

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