दुर्ग। छत्तीसगढ़ में दुर्ग जिले के पुलगांव थाना क्षेत्र में पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त कार्रवाई में बड़े पैमाने पर अवैध अफीम की खेती का खुलासा हुआ है। मक्का (भुट्टा) की फसल के बीच छिपाकर करीब 5 एकड़ 62 डिसमिल जमीन पर अफीम के पौधे लगाए गए थे, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 8 करोड़ रुपए आंकी जा रही है।
पुलिस को सूचना मिली थी कि, जेवरा–सिरसा चौकी क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम समोदा, झेनझरी और सिरसा के बीच स्थित खेत में अवैध रूप से अफीम की खेती की जा रही है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और मामले में शून्य में अपराध दर्ज कर जांच शुरू की गई।
मक्का की फसल के बीच छिपाकर लगाई गई थी अफीम
मौके पर निरीक्षण के दौरान पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने पाया कि मक्का (भुट्टे) की फसल के बीच-बीच में अफीम के पौधे लगाए गए थे, ताकि खेती को आसानी से छिपाया जा सके। जांच के बाद संयुक्त टीम ने लगभग 5 एकड़ 62 डिसमिल क्षेत्र में लगी अफीम की फसल को जप्त कर लिया।
बाहर से बुलाए गए थे मजदूर
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि, अफीम की खेती कराने के लिए बाहर से लोगों को बुलाकर काम कराया जा रहा था। पुलिस को इस मामले में एक बड़े नेटवर्क की आशंका भी है।
NDPS एक्ट के तहत कार्रवाई
पुलिस ने इस मामले में NDPS एक्ट के तहत वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है। जब्त किए गए अफीम के पौधों की न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष विधिवत सैंपलिंग कराई गई है। मामले में इन आरोपियों के नाम सामने आए है, जिसमें विनायक ताम्रकार, निवासी तेमरापारा, दुर्ग, विकास बिश्नोई, निवासी ग्राम मटोडा, थाना मटोडा, जिला जोधपुर (राजस्थान) और मनीष ठाकुर को गिरफ्तार किया है, इनसे लगभग 5 एकड़ 62 डिसमिल क्षेत्र में लगे अफीम के पौधे जब्त किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 8 करोड़ रुपए है। पुलिस का कहना है कि, मामले की गहन जांच की जा रही है और फरार आरोपियों की तलाश जारी है।
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