रायपुर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में 13 दिनों के भीतर मलेरिया से 5 लोगों की मौत के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है। आयोग ने मामले को गंभीर मानते हुए 2 सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

NHRC ने अपने नोटिस में कहा है कि, यदि मीडिया रिपोर्टों में प्रकाशित तथ्य सही हैं, तो यह मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मामला हो सकता है। आयोग ने विशेष रूप से 11 वर्षीय बालक की मौत का उल्लेख किया है, जिसकी प्रारंभिक जांच में मलेरिया की पुष्टि नहीं हुई थी, लेकिन बाद में रिपोर्ट पॉजिटिव आने तक उसकी मौत हो चुकी थी।
इधर, इस पूरे मामले को लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने केंद्र और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि, केंद्र सरकार से बस्तर संभाग के मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकेटेड मच्छरदानियों की खरीदी के लिए लगभग 68 करोड़ रुपए का फंड करीब 6 सप्ताह पहले प्राप्त हुआ, जबकि यह राशि करीब 3 वर्ष की देरी के बाद जारी की गई है।
डॉ. गुप्ता का आरोप है कि, स्वास्थ्य विभाग के संचालक स्तर से अब तक खरीदी प्रक्रिया शुरू करने के लिए आवश्यक सहमति नहीं भेजी गई, जिसके कारण मच्छरदानियों की खरीदी शुरू नहीं हो सकी है। उन्होंने यह भी कहा कि, कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड के माध्यम से भी बस्तर संभाग के सभी कलेक्टरों को मेडिकेटेड मच्छरदानियों की खरीदी के लिए सहमति प्रदान की गई थी, लेकिन अज्ञात कारणों से यह प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ सकी।
डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा कि, यदि समय पर मेडिकेटेड मच्छरदानियों की उपलब्धता और वितरण सुनिश्चित किया जाता, तो मलेरिया की रोकथाम में मदद मिल सकती थी। उन्होंने मांग की कि प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल व्यापक स्क्रीनिंग, दवा वितरण, मच्छर नियंत्रण अभियान और मेडिकेटेड मच्छरदानियों का वितरण सुनिश्चित किया जाए।
फिलहाल, NHRC के स्वतः संज्ञान लेने के बाद इस मामले ने गंभीर प्रशासनिक और स्वास्थ्य संबंधी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर राज्य सरकार द्वारा आयोग को भेजी जाने वाली रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर टिकी है।
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