जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के करीब 13 वर्ष पुराने मामले में बुधवार को NIA की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने मामले में दोषी ठहराए गए 10 नक्सलियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने 5 सितंबर को सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था। इसके बाद बुधवार को सजा का ऐलान किया गया। अदालत ने सभी दोषियों को हाईकोर्ट में अपील के लिए 30 दिन का समय दिया है। सभी दोषी फिलहाल केंद्रीय कारागार में बंद हैं।
इन 10 दोषियों को मिली फांसी की सजा
इस मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई चली थी। ट्रायल के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई थी। इसके बाद 10 आरोपियों के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया जारी रही।
1000 पन्नों की चार्जशीट, 101 गवाहों के बयान
NIA ने वर्ष 2015 में करीब 1000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अभियोजन और बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं के मुताबिक, आरोपियों पर लगाई गई गंभीर धाराओं में आजीवन कारावास से लेकर मृत्युदंड तक का प्रावधान है। अदालत ने दोषी पाए गए सभी 10 आरोपियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई।
25 मई 2013 को हुआ था झीरम घाटी हमला
25 मई 2013 को सुकमा से लौट रही कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले को दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी में नक्सलियों ने निशाना बनाया था। इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं समेत 32 लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे। हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा समेत कई प्रमुख नेताओं की मौत हुई थी।
यह हमला छत्तीसगढ़ के राजनीतिक इतिहास की सबसे बड़ी हिंसक घटनाओं में से एक रहा। घटना के बाद लंबे समय तक इसकी जांच और न्यायिक प्रक्रिया चलती रही।
अंतिम बहस के बाद फैसले का था इंतजार
मामले में अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत के फैसले का इंतजार किया जा रहा था। पहले 31अगस्त 2026 को फैसला सुनाए जाने की तारीख तय हुई थी, जिसे बाद में बदलकर 5 सितंबर 2026 किया गया। 5 सितंबर 2026 को अदालत ने सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया। बुधवार को सजा के बिंदु पर सुनवाई के बाद अदालत ने सभी 10 दोषियों को मृत्युदंड सुनाया।
अब हाईकोर्ट में होगी आगे की प्रक्रिया
अदालत के फैसले के बाद दोषियों के पास हाईकोर्ट में अपील का विकल्प है। अदालत ने इसके लिए 30 दिन का समय दिया है। मृत्युदंड की सजा के मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया और हाईकोर्ट की कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी।
करीब 13 वर्ष पहले हुई इस घटना के मामले में आया यह फैसला अब आगे की कानूनी प्रक्रिया के चलते भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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