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अंतिम संस्कार पर 5 घंटे बवाल: धर्मांतरण के आरोपों के बीच गांव में तनाव, लिखित सहमति के बाद महिला का अंतिम संस्कार

 Newsbaji  |  Oct 05, 2026 11:11 AM  | 
Last Updated : Oct 05, 2026 11:11 AM
धर्मांतरण के आरोपों के बीच अंतिम संस्कार को लेकर विवाद, सहमति के बाद हुआ अंतिम संस्कार
धर्मांतरण के आरोपों के बीच अंतिम संस्कार को लेकर विवाद, सहमति के बाद हुआ अंतिम संस्कार

धमतरी। जिले के भटगांव के मजराटोला में रविवार को एक महिला के अंतिम संस्कार को लेकर करीब पांच घंटे तक विवाद की स्थिति बनी रही। परिवार के धर्मांतरण के आरोपों को लेकर समाज के लोगों ने अंतिम संस्कार में शामिल होने से इनकार कर दिया। मामला बढ़ने पर गांव में बैठक हुई और काफी देर तक बातचीत का दौर चला। इस दौरान विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंचे।

जानकारी के मुताबिक, भटगांव के मजराटोला निवासी सुरेश साहू की पत्नी सरस्वती की 3 अक्टूबर 2026 की रात मौत हो गई थी। रविवार सुबह परिवार अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहा था। इसी दौरान कुछ ग्रामीणों ने परिवार के कथित तौर पर ईसाई धर्म अपनाने का हवाला देते हुए अंतिम संस्कार में शामिल होने से इनकार कर दिया। देखते ही देखते मामला विवाद में बदल गया और गांव में तनावपूर्ण स्थिति बन गई।

गांव में चली कई घंटे तक बैठक
विवाद के बाद ग्रामीणों की बैठक बुलाई गई। अंतिम संस्कार को लेकर दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक चर्चा चलती रही। इसी बीच हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंचे। बताया गया कि परिवार के धर्मांतरण को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी थी।

कई घंटे चले घटनाक्रम के बाद सुरेश ने हिंदू धर्म में वापस आने के लिए लिखित सहमति दी। इसके बाद धार्मिक प्रक्रिया पूरी कराई गई। परिजनों को गंगाजल और तुलसी का पत्ता दिया गया तथा तिलक लगाया गया।

सहमति के बाद हुआ अंतिम संस्कार
मामला शांत होने के बाद सरस्वती का अंतिम संस्कार गांव के शांति घाट में हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार कराया गया। गांव के सरपंच फांगूराम साहू ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि मामला मजराटोला का है और महिला का अंतिम संस्कार गांव में ही कराया गया।

ग्रामीणों का दावा है कि, सुरेश का परिवार पिछले करीब चार वर्षों से ईसाई धर्म का पालन कर रहा था। ग्रामीणों के अनुसार, अब परिवार ने दोबारा धर्म परिवर्तन नहीं करने की बात कही है।

हालांकि, परिवार के धर्मांतरण से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। घटना के दौरान किसी अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए गांव में काफी देर तक लोगों की मौजूदगी बनी रही। अंततः सहमति बनने के बाद अंतिम संस्कार संपन्न कराया गया।

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