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IAS की नौकरी छोड़ राजनीति में उतरीं दिव्या मित्तल, नई पार्टी ‘जननीति भारत’ का किया ऐलान; जनता की भागीदारी पर जोर

 Newsbaji  |  Oct 15, 2026 02:07 PM  | 
Last Updated : Oct 15, 2026 02:07 PM
IAS छोड़ राजनीति में उतरीं म, नई पार्टी ‘जननीति भारत’ का ऐलान
IAS छोड़ राजनीति में उतरीं म, नई पार्टी ‘जननीति भारत’ का ऐलान

लखनऊ। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की नौकरी छोड़कर राजनीति में कदम रखने वालीं दिव्या मित्तल ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी ‘जननीति भारत’ बनाने का ऐलान किया है। सोशल मीडिया पर लाइव आकर उन्होंने चुनाव लड़ने की घोषणा की और कहा कि उनकी राजनीतिक पहल का उद्देश्य आम लोगों की आवाज को नीतियों के केंद्र में लाना है।

उन्होंने पार्टी की सोच स्पष्ट करते हुए कहा, “राजनीति आप पर राज करती है, लेकिन ये दल आपके राज के लिए बना है।”
दिव्या मित्तल ने कहा कि, देश में राजनीतिक दलों की कमी नहीं है, बल्कि समस्या यह है कि हर व्यक्ति की बात नहीं सुनी जाती। इसी स्थिति को बदलने के उद्देश्य से उन्होंने ‘जननीति भारत’ की शुरुआत करने का फैसला किया है। उन्होंने गंगा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां हर बूंद बराबर है। इसी समानता की भावना के साथ उनकी पार्टी आम लोगों की जरूरतों और समस्याओं को प्राथमिकता देने का प्रयास करेगी।

दिव्या मित्तल: https://x.com/divyamittal_ias/status/2110637094561571016?s=48

जननीति भारत के तीन वचन, आम लोगों की जरूरतों पर रहेगा फोकस
दिव्या मित्तल ने अपने वीडियो संदेश में पार्टी के तीन प्रमुख वचनों के बारे में बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नई राजनीतिक पहल में नीतियां जनता की वास्तविक जरूरतों और अनुभवों के आधार पर तैयार करने पर जोर दिया जाएगा।

1. जनता की जरूरतों के मुताबिक बनेंगी नीतियां
पार्टी का पहला वचन आम लोगों की समस्याओं को समझकर उनके अनुरूप नीतियां बनाने से जुड़ा है। किसानों और छोटे व्यापारियों की समस्याओं का समाधान उनके वास्तविक अनुभवों और सुझावों के आधार पर तैयार करने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नीतियां केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला सकें।

2. जाति-धर्म नहीं, वास्तविक जरूरतों को मिलेगी प्राथमिकता
दूसरे वचन के तहत विकास कार्यों और प्रशासनिक फैसलों में जाति, धर्म या अन्य पहचान के बजाय लोगों की वास्तविक आवश्यकताओं को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया है। महिलाओं की सुरक्षा को भी प्रमुख मुद्दा बनाया गया है। पार्टी की घोषित सोच के अनुसार, विकास और जनकल्याण के फैसलों में आम नागरिकों की समस्याएं सबसे महत्वपूर्ण होंगी।

3. विकास कार्यों में जनता की सीधी भागीदारी
तीसरे वचन के तहत स्थानीय स्तर पर होने वाले विकास कार्यों में जनता की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य लोगों की जरूरतों के अनुरूप योजनाएं बनाना, उनके क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ाना और विकास कार्यों के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

लोगों के संदेशों से बढ़ा उत्साह, व्हाट्सऐप नंबर बंद होने पर मांगी माफी
दिव्या मित्तल ने बताया कि राजनीति में आने की घोषणा के बाद उन्होंने लोगों से संवाद करने के लिए एक मोबाइल नंबर साझा किया था। इस नंबर पर बड़ी संख्या में संदेश आने लगे, जिसके कारण व्हाट्सऐप ने उसे रोक दिया। उन्होंने इस असुविधा के लिए लोगों से माफी मांगी और उनके समर्थन के प्रति आभार व्यक्त किया।

उन्होंने अपने संदेश में कहा कि वह उम्मीद का दीया लेकर निकली थीं, लेकिन लोगों से मिले संदेशों और समर्थन ने उन्हें सूरज के सामने खड़े होने जैसा एहसास कराया। उनके मुताबिक, लोगों की प्रतिक्रियाओं ने इस पहल को आगे बढ़ाने का हौसला दिया।

दिव्या मित्तल ने कहा कि उनकी पार्टी का उद्देश्य ऐसी राजनीतिक व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें आम नागरिकों की बात सुनी जाए और उनकी समस्याओं को नीतियां बनाने की प्रक्रिया में उचित स्थान मिले।

13 वर्ष की IAS की नौकरी बाद, अब राजनीति का फैसला
दिव्या मित्तल वर्ष 2013 बैच की IAS अफसर रही हैं। करीब 13 वर्षों की प्रशासनिक सेवा के बाद उन्होंने अपनी इच्छा से पद छोड़ने का फैसला किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर अपनी प्रशासनिक सेवा यात्रा समाप्त करने की जानकारी दी थी।

दिव्या मित्तल की शिक्षा IIT दिल्ली और IIM बेंगलुरु जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में हुई। पढ़ाई के बाद उन्होंने लंदन में नौकरी की, लेकिन देश के लिए कुछ करने की इच्छा उन्हें भारत वापस ले आई। इसके बाद उन्होंने सिविल सेवा में प्रवेश किया और प्रशासनिक अधिकारी के रूप में अपनी पहचान बनाई।

मिर्जापुर और देवरिया में जिलाधिकारी के रूप में कर चुकी हैं काम
अपने प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान दिव्या मित्तल मिर्जापुर और देवरिया सहित विभिन्न जिलों में जिलाधिकारी के पद पर तैनात रहीं। उनकी पहचान सख्त प्रशासनिक कार्यशैली और फैसलों को लेकर चर्चा में रहने वाली अधिकारी के रूप में बनी। उनके कार्यकाल के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ मतभेदों की चर्चाएं भी सामने आती रही थीं। मिर्जापुर में विकास कार्यों को लेकर स्थानीय नेताओं के साथ उनके टकराव की बातें भी कही जाती रही हैं।

नौकरी छोड़ने की जानकारी देते हुए दिव्या मित्तल ने अपनी 13 वर्षों की सेवा को अविस्मरणीय बताया था। उन्होंने कहा था कि वह देश को कुछ देने के उद्देश्य से आई थीं, लेकिन लोगों से मिले प्यार, सम्मान और अपनापन ने उन्हें बहुत कुछ दिया। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान सहयोग करने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य सहयोगियों के प्रति भी आभार व्यक्त किया था।

अब चुनावी राजनीति में नई चुनौती
प्रशासनिक सेवा से राजनीति में आईं दिव्या मित्तल के सामने अब अपनी नई पार्टी को संगठनात्मक रूप देने और जनता के बीच अपनी राजनीतिक सोच पहुंचाने की चुनौती होगी। ‘जननीति भारत’ के जरिए उन्होंने आम नागरिकों की भागीदारी, जरूरत आधारित नीतियों, पारदर्शिता और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों को प्रमुखता देने का संकेत दिया है।

बहरहाल, पार्टी की चुनावी रणनीति, संगठन के विस्तार, संभावित उम्मीदवारों और चुनाव लड़ने के क्षेत्र को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दिव्या मित्तल अपनी प्रशासनिक पृष्ठभूमि और घोषित राजनीतिक वादों को चुनावी समर्थन में किस तरह बदल पाती हैं।

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