रायपुर। राजधानी रायपुर में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां साइबर ठगों ने जांच एजेंसी NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) का अफसर बनकर 62 वर्षीय महिला को 5 दिनों तक कथित तौर पर डिजिटल अरेस्ट के नाम पर मानसिक दबाव में रखा और उनसे 7 लाख रुपए ठग लिए। आरोपियों ने महिला को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने और गिरफ्तार करने की धमकी देकर ऐसा जाल बुना कि वह डर के चलते उनकी बातों में आती रहीं। आखिरकार अपनी FD तुड़वाकर रकम दूसरे खाते में ट्रांसफर कर दी।
पीड़िता रायपुर के स्टेशन रोड इलाके में रहती हैं और मशीन मरम्मत का काम करती हैं। मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर संबंधित बैंक खाते की जांच शुरू कर दी है।
आधार कार्ड से मनी लॉन्ड्रिंग तक की कहानी, व्हाट्सऐप कॉल से शुरू हुआ खेल
जानकारी के मुताबिक, 7 अक्टूबर 2026 की दोपहर महिला के मोबाइल पर एक व्हाट्सऐप कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने अपना नाम विक्रम सिंह बताया और खुद को रायपुर में तैनात NIA अधिकारी बताया। उसने महिला को डराते हुए दावा किया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल कर महाराष्ट्र में एक फर्जी बैंक खाता खोला गया है। इस खाते में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी रकम जमा हुई है और उनके नाम पर गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है।
आरोपी ने अपनी बात को सच साबित करने के लिए महिला को व्हाट्सऐप पर एक कथित आधिकारिक पत्र भी भेजा। इस फर्जी दस्तावेज के जरिए महिला के मन में गिरफ्तारी का डर बैठाया गया। इसके बाद ठगों ने उनके परिवार, संपत्ति, बैंक खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से जुड़ी जानकारी हासिल कर ली।
दूसरा अधिकारी बनकर बनाया दबाव, गिरफ्तारी की धमकी से सहमी महिला
ठगी के इस पूरे खेल में आरोपियों ने एक के बाद एक नई चाल चली। 8 अक्टूबर को महिला की बातचीत राकेश अग्रवाल नाम के व्यक्ति से कराई गई, जिसे वरिष्ठ अफसर बताया गया। उसने भी महिला को कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसने और जेल जाने का डर दिखाया।
आरोपी लगातार फोन करके महिला पर मानसिक दबाव बनाते रहे। उन्हें चेतावनी दी गई कि अगर उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया तो उन्हें तत्काल गिरफ्तार कर लिया जाएगा। कानूनी कार्रवाई के डर से महिला आरोपियों के निर्देशों का पालन करती रहीं। ठगों ने उन्हें यह विश्वास दिलाने की कोशिश की कि वह किसी गंभीर आपराधिक मामले की जांच के घेरे में हैं।
FD तुड़वाई, फिर RTGS के जरिए दूसरे खाते में ट्रांसफर कराए 7 लाख
आरोपियों के दबाव में आकर महिला ने 9 अक्टूबर को केनरा बैंक में अपनी FD तुड़वाने की प्रक्रिया शुरू की। ठगों ने बैंक की छुट्टियों के दौरान भी फोन करके उन्हें निर्देश देना जारी रखा। इसके बाद 12 अक्टूबर को आरोपियों ने महिला को रकम HDFC बैंक में ट्रांसफर करने के लिए कहा। बताया गया कि वीडियो कॉल के दौरान ही उनसे RTGS फॉर्म भरवाया गया। फॉर्म में ‘महाकाली मेटल’ नाम से जुड़े खाते का विवरण दर्ज कराकर महिला से 7 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए गए।
रकम भेजने के बाद महिला ने ट्रांजैक्शन की रसीद भी व्हाट्सऐप के जरिए आरोपियों को भेज दी। इस तरह ठगों ने कथित जांच और गिरफ्तारी के डर का फायदा उठाकर महिला की जमा पूंजी पर हाथ साफ कर दिया।
RBI के नाम से भेजा फर्जी सर्टिफिकेट, NOC नहीं मिली तो हुआ शक
रकम ट्रांसफर कराने के बाद भी आरोपियों का खेल खत्म नहीं हुआ। महिला का भरोसा बनाए रखने के लिए उन्हें भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नाम से एक कथित नकली सर्टिफिकेट भेजा गया। आरोपियों ने भरोसा दिलाने की कोशिश की कि पूरी प्रक्रिया जांच का हिस्सा है।
लेकिन जब महिला को NOC (अनापत्ति प्रमाणपत्र) नहीं मिला, तो उन्हें पूरे मामले पर शक होने लगा। इसके बाद उन्हें एहसास हुआ कि वह साइबर ठगों के जाल में फंस चुकी हैं। पीड़िता ने मामले की शिकायत गंज थाने में दर्ज कराई।
गंज थाना पुलिस ने दर्ज किया मामला, बैंक खाते की जांच जारी
ठगी का पता चलने के बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस संबंधित बैंक खाते और लेनदेन की जांच कर रही है। अब जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि रकम किस खाते में पहुंची और इस वारदात के पीछे कौन लोग शामिल हैं।
सावधान! डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराकर ठगी कर रहे साइबर अपराधी
यह मामला एक बार फिर बताता है कि, साइबर ठग किस तरह सरकारी एजेंसियों के नाम और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके लोगों को डराते हैं। वे खुद को पुलिस, NIA या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर गिरफ्तारी का भय पैदा करते हैं और फिर जांच के नाम पर बैंक खातों से रकम ट्रांसफर करवाते हैं।
ध्यान रखें
फोन या वीडियो कॉल पर कोई भी व्यक्ति खुद को सरकारी अधिकारी बताकर आपको तथाकथित डिजिटल अरेस्ट में नहीं रख सकता और न ही जांच के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बना सकता है। ऐसे कॉल आने पर घबराएं नहीं, पैसे ट्रांसफर न करें और किसी भी दस्तावेज की सत्यता की स्वतंत्र रूप से जांच करें। साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने पर तुरंत अपने बैंक को सूचित करें और भारत की साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें। शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी दर्ज की जा सकती है।
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