बिलासपुर. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में लिव इन रिलेशनशिप से अलग हो चुके कपल के मामले में नेचुरल पिता को बच्चे की कस्टडी देने से मना कर दिया है. साथ ही लिव इन रिलेशनशिप पर कड़ी टिप्पणी भी की है. डिवीजन बेंच ने कहा कि ये भारतीय संस्कृति पर कलंक है.
बता दें कि मामला दंतेवाड़ा जिले का है. यहां रहने वाला अब्दुल हमीद सिद्दिकी शादीशुदा ही नहीं, बल्कि 3 बच्चों का पिता है. इसके बाद भी वह एक हिंदू महिला के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रह रहा था. फिर साल 2021 में महिला ने धर्म परिवर्तन किए बिना ही उससे शादी कर ली. इस बीच महिला ने एक बच्चे को जन्म दिया. बाद में महिला बच्चे को लेकर हमीद के पास से चली गई.
इसके बाद बच्चे की कस्टडी पाने के लिए हमीद ने परिवार न्यायालय में परिवाद पेश किया. साथ ही बच्चे का नेचुरल पिता होने का हवाला देते हुए बच्चे की कस्टडी की मांग की. इस पर कोर्ट ने सुनवाई करते हुए उसकी मांग को खारिज कर दिया. इसके बाद उसने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की और बच्चे को दिलाने की मांग की.
कोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. बीते 30 अप्रैल को इस पर फैसला सुनाया गया. इसमें न सिर्फ बच्चे की कस्टडी देने की मांग संबंधी हमीद की याचिका खारिज कर दी, बल्कि लिव इन रिलेशनशिप को लेकर सख्त टिप्पणी भी की. इसमें लिव इन को भारतीय संस्कृति पर कलंक बताया है. मामले की सुनवाई जस्टिस गौतम भादुड़ी और जस्टिस संजय एस. अग्रवाल के डिवीजन बेंच में हुई है.
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