रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में महज 24 घंटे के भीतर 159 गुमशुदगी के मामले दर्ज होने से पुलिस महकमे से लेकर सियासी गलियारों तक हलचल तेज हो गई है। सामने आए आंकड़ों में 78 महिलाएं, 54 वयस्क पुरुष, 17 बच्चे और 10 बुजुर्ग शामिल हैं।
इसी मुद्दे को लेकर प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने भाजपा सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजधानी में कानून-व्यवस्था पर सरकार का नियंत्रण कमजोर पड़ गया है और अपराधियों में कानून का भय खत्म हो गया है। वर्मा ने गृह मंत्री से नैतिक आधार पर इस्तीफे की मांग की है।
159 मामले, सबसे ज्यादा महिलाएं
कांग्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार से रविवार के बीच रायपुर कमिश्नरेट और ग्रामीण थाना क्षेत्रों में 159 गुमशुदगी की FIR दर्ज की गईं। कमिश्नरेट क्षेत्र में उरला और मुजगहन समेत कई थानों में बड़ी संख्या में मामले सामने आए हैं।
इन आंकड़ों ने खास तौर पर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि पुलिस की जांच में हर गुमशुदगी के पीछे अलग-अलग परिस्थितियां सामने आ सकती हैं। रिपोर्टों में घरेलू विवाद, प्रेम संबंध, पारिवारिक परिस्थितियों और अन्य कारणों की भी जांच किए जाने की बात सामने आई है।
कांग्रेस का बड़ा हमला- ‘रायपुर बन गया लापता शहर’
कांग्रेस नेता सुरेंद्र वर्मा ने इन आंकड़ों को लेकर सरकार पर तीखा हमला करते हुए रायपुर को ‘लापता शहर’ करार दिया। उन्होंने कहा कि हर घंटे करीब सात लोगों के लापता होने का आंकड़ा राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
वर्मा ने पुलिस पेट्रोलिंग, सर्विलांस और खुफिया तंत्र को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने सवाल उठाया कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए पुलिस की जमीनी व्यवस्था कितनी प्रभावी है और इतनी बड़ी संख्या में सामने आ रहे गुमशुदगी के मामलों की रोकथाम के लिए सरकार की रणनीति क्या है।
मानव तस्करी के एंगल पर भी सवाल
कांग्रेस ने बड़ी संख्या में महिलाओं और बच्चों के लापता होने को मानव तस्करी और संगठित अपराध की आशंका से जोड़ते हुए सरकार से जवाब मांगा है। हालांकि 159 गुमशुदगी के मामलों को सीधे मानव तस्करी के मामले मानना अभी उचित नहीं है। पुलिस प्रत्येक मामले की परिस्थितियों के आधार पर जांच कर रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद पुलिस गुमशुदगी के मामलों में इस पहलू की भी जांच कर रही है कि कहीं किसी व्यक्ति को बंधक बनाकर तो नहीं रखा गया अथवा गलत तरीके से छिपाया गया है।
‘डायल-112 और अभिव्यक्ति ऐप’ पर भी सियासत
कांग्रेस ने पूर्ववर्ती सरकार के दौरान महिलाओं की सुरक्षा के लिए शुरू की गई अभिव्यक्ति ऐप और डायल-112 जैसी व्यवस्थाओं का हवाला देते हुए मौजूदा सरकार से सवाल किए हैं। वर्मा ने आरोप लगाया कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए पहले की व्यवस्थाओं को पर्याप्त मजबूती नहीं दी गई।
पुलिस के रिकॉर्ड में भी बड़ी संख्या में बरामदगी
दूसरी ओर, पुलिस की कार्रवाई का एक दूसरा पक्ष भी सामने आता है। अप्रैल 2026 में चलाए गए ‘ऑपरेशन तलाश’ के दौरान छत्तीसगढ़ पुलिस ने एक महीने में 4,056 गुमशुदा लोगों को तलाशकर उनके परिजनों तक पहुंचाया, जिनमें 545 बच्चे और 2,539 महिलाएं शामिल थीं। रायपुर जिले से 426 लोगों को तलाशा गया था।
यानी मौजूदा विवाद का केंद्र अब सिर्फ गुमशुदगी के आंकड़े नहीं, बल्कि यह सवाल भी है कि इन मामलों में कितने लोग सुरक्षित बरामद हुए, कितने मामलों में अपराध का एंगल मिला और महिलाओं-बच्चों की गुमशुदगी रोकने के लिए पुलिस की अगली रणनीति क्या है।
गृह मंत्री से कांग्रेस के सीधे सवाल
कांग्रेस ने सरकार से पूछा है कि राजधानी में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं? पुलिस पेट्रोलिंग और सर्विलांस व्यवस्था कितनी प्रभावी है? 159 मामलों में अब तक कितने लोगों का पता चला है? और क्या किसी मामले में मानव तस्करी या संगठित अपराध का एंगल सामने आया है?
रायपुर में 159 गुमशुदगी के आंकड़े ने कानून-व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब निगाह इस बात पर है कि पुलिस इन मामलों में कितनी तेजी से कार्रवाई करती है और सरकार विपक्ष के सवालों का क्या जवाब देती है।
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