नेशनल डेस्क। केंद्र सरकार के नवंबर 2016 के 1000 रुपए और 500 रुपए के करेंसी नोटों पर प्रतिबंध लगाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द करते हुए नोटबंदी को वैधानिक करार दिया है। सरकार के इस कदम ने रातों-रात 10 लाख करोड़ रुपए सर्कुलेशन से वापस ले लिए थे। न्यायमूर्ति एस.ए. नजीर की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने इस मामले पर अपना फैसला सुनाया।
58 याचिकायों को खारिज किया
सुप्रीम कोर्ट ने सभी 58 याचिकाओं को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस फैसले को उलटा नहीं जा सकता। नोटबंदी के फैसले में कोई गलती नहीं हुई। साथ ही यह भी कहा कि रिकॉर्ड की जांच के बाद हमने पाया है कि निर्णय लेने की प्रक्रिया केवल इसलिए त्रुटिपूर्ण नहीं हो सकती है क्योंकि यह केंद्र सरकार से निकली है और हमने माना है कि टर्म सिफारिश को वैधानिक योजना से समझा चाहिए।
नोटबंदी को गलत और त्रुटिपूर्ण बताते हुए कांग्रेस नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता पी चिदंबरम ने तर्क दिया था कि सरकार कानूनी निविदा से संबंधित किसी भी प्रस्ताव को अपने दम पर शुरू नहीं कर सकती है, जो केवल RBI के केंद्रीय बोर्ड की सिफारिश पर किया जा सकता है।
बता दे, एक हलफनामे में केंद्र ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि नोटबंदी की कवायद एक सुविचारित निर्णय था और नकली धन, आतंकवाद के वित्तपोषण, काले धन और कर चोरी के खतरे से निपटने के लिए एक बड़ी रणनीति का हिस्सा था।
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