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कनॉट प्लेस में तिरंगा फहराने के ऐलान से दिल्ली में हलचल, सेंट्रल पार्क 16 और 17 अक्टूबर को बंद; सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम

 Newsbaji  |  Oct 16, 2026 01:34 PM  | 
Last Updated : Oct 16, 2026 01:34 PM
तिरंगा फहराने के ऐलान के बाद कनॉट प्लेस में सुरक्षा सख्त, सेंट्रल पार्क बंद
तिरंगा फहराने के ऐलान के बाद कनॉट प्लेस में सुरक्षा सख्त, सेंट्रल पार्क बंद

दिल्ली। राजधानी दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में 16 अक्टूबर को तिरंगा फहराने के कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ऐलान ने पुलिस और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। संभावित भीड़ को देखते हुए नई दिल्ली और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। वहीं, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMS) ने प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्टूबर को बंद रखने का फैसला किया है।

CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया है कि, वह हर हाल में सेंट्रल पार्क में तिरंगा फहराएंगे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज देश के 130 करोड़ लोगों का है, किसी एक संस्था का नहीं। उनका सवाल है कि भारत का तिरंगा फहराने के लिए आखिर अनुमति की जरूरत क्यों होनी चाहिए?

CCTV कैमरों से निगरानी, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट
16 अक्टूबर को शाम 5:00 बजे सेंट्रल पार्क में राष्ट्रीय ध्वज के साथ जुटने की अपील के बाद पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। भीड़ की निगरानी और किसी अप्रिय घटना की स्थिति में साक्ष्य जुटाने के लिए पार्क और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।

दिल्ली पुलिस की DCP नेहा यादव के मुताबिक, CJP ने सोशल मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से लोगों से कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की है। पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू होने की जानकारी दी है।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि, वे निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने वाली किसी सभा में शामिल न हों। अफसरों ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, पुलिस के अनुसार, कुछ चुनिंदा प्रदर्शनकारियों को किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर तिरंगा मार्च निकालने की अनुमति देने पर विचार किया जा सकता है।

CJP के दो सह-संयोजक न्यायिक हिरासत में
इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुआ प्रदर्शन है। CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका और सौरव दास को वहां तिरंगा फहराकर प्रदर्शन करने के मामले में पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की खबर है।

इसके बाद अभिजीत दीपके ने समर्थकों से 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में पहुंचकर तिरंगा फहराने की अपील की। इस घोषणा के बाद कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

'गिरफ्तारी से नहीं डरते, तिरंगे के लिए जेल जाने को तैयार'
15 अक्टूबर को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभिजीत दीपके ने कहा कि दिल्ली पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर सकती है, लेकिन वह इससे डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी कार्रवाई से वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।

दीपके ने कहा कि यदि देश में तिरंगा फहराने के लिए जेल जाना पड़े, तो वे इसके लिए भी तैयार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 10 अक्टूबर को CJP के दिल्ली बंद के आह्वान के बाद बसों और मेट्रो सेवाओं को बंद किया गया, बैरिकेडिंग की गई और इंटरनेट सेवाएं बाधित की गईं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सेंट्रल पार्क में तिरंगा फहराने की घोषणा के बाद पार्क बंद कर दिया गया।

दीपके ने सवाल उठाया कि यदि वे भविष्य में 100 जगहों पर तिरंगा फहराने का ऐलान करें, तो क्या प्रशासन सभी स्थानों को बंद कर देगा? उन्होंने पूछा कि क्या राष्ट्रीय ध्वज लेकर किसी राजनीतिक रैली में जाना भी विवाद का कारण बनेगा।

आम आदमी पार्टी ने भी की शामिल होने की अपील
इस मामले में आम आदमी पार्टी (आप) की ओर से भी अपने कार्यकर्ताओं, समर्थकों और आम लोगों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील किए जाने की बात सामने आई है। इससे कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गई हैं।

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की उपलब्ध कंपनियों में से प्रत्येक शिफ्ट में 30 कंपनियों की तैनाती की योजना बताई गई है। दिन में तीन शिफ्टों में सुरक्षा व्यवस्था संभाली जाएगी। जरूरत पड़ने पर रात में तैनात कंपनियों की संख्या बढ़ाकर 60 करने का विकल्प भी रखा गया है। सुरक्षा बलों की तैनाती नई दिल्ली, आसपास के जिलों, सीमावर्ती इलाकों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर की जा सकती है।

तिरंगे पर विवाद या कानून-व्यवस्था का सवाल?
सेंट्रल पार्क में तिरंगा फहराने को लेकर उठा यह विवाद अब केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रह गया है। एक तरफ CJP इसे राष्ट्रीय ध्वज फहराने के अधिकार से जोड़कर देख रही है, वहीं पुलिस और प्रशासन का जोर कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा संभावित भीड़ को नियंत्रित करने पर है।
 

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