दुर्ग। छत्तीसगढ़ में ठगी की वारदातों में तेजी से इजाफा हो रहा है। एक ठग गिरोह ने मंत्रालय में सरकारी नौकरी लगाने के नाम पर 12 लोगों से लगभग 70 लाख रुपए की धोखाधड़ी करने की वारदात सामने आई है। इस मामले में पिता-पुत्र को अंजोरा थाना पुलिस ने बस स्टैंड दुर्ग से गिरफ्तार किया है। वहीं, तीसरा आरोपी अरुण मेश्राम, राजनांदगांव का रहने वाला फरार है, जिसकी पुलिस तलाश कर रही है।
ठगी की पूरी कहना
जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने बेरोजगारों से मंत्रालय में चपरासी के लिए 2,50,000 रुपए और बाबू के पद पर नियुक्ति के लिए 4 लाख रुपए तक की रकम वसूली है। अब तक 12 लोगों से ठगी की जानकारी सामने आ चुकी है। आरोपियों ने कुल मिलाकर करीब 70 लाख रुपए की धोखाधड़ी की बात कबूल की है। इस राशि से ग्राम कुथरेल में 12 लाख रुपए का प्लाट खरीदा गया है, जबकि बाकी रकम पिता-पुत्र ने खर्च कर डाली है।
दरअसल, शिकायतकर्ता संतराम देशमुख चिरवार गांव जिला बालोद ने 2 जुलाई 2022 को मुकदमा दर्ज कराया था कि, आरोपी भेषराम और रविकांत ने अपने साथी अरुण मेश्राम के साथ मिलकर नौकरी लगाने के नाम पर उनसे 5 लाख रुपए ठग लिए है। आरोपियों ने उन्हें मंत्रालय में नियुक्ति का झांसा दिया था, लेकिन नौकरी नहीं लगी। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस जांच में अन्य शिकायतकर्ताओं में लोमश देशमुख और हेमंत कुमार साहू द्वारा भी नौकरी के नाम पर ठगी की शिकायतें मिली है।
पूछताछ में खुला रैकेट
जांच के दौरान शिकायतकर्ताओं के बयान, ऑनलाइन ट्रांसफर की जानकारी और दस्तावेजों की जांच कर आरोपियों की तलाश की गई। 06 सितंबर 2025 को पुलिस ने भेषराम और रविकांत को पकड़कर पूछताछ की। दोनों ने ठगी की बात स्वीकार करते हुए बताया कि, उन्होंने अरुण मेश्राम के साथ मिलकर नौकरी का झांसा देकर 70 लाख रुपए की धोखाधड़ी की है। इसके अलावा उन्होंने कबूल किया कि अपने हिस्से में मिले 20 लाख रुपए में से 12 लाख रुपए में कुथरेल गांव में एक प्लाट खरीदा है।
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