दुर्ग/रायपुर। छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण और ह्यूमन ट्रैफिकिंग मामले में गिरफ्तार नन और एक युवक की जामनत याचिका पर दुर्ग कोर्ट ने सुनवाई करने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि, ये मामला उनके क्षेत्राधिकार से बाहर का है, इसलिए सक्षम न्यायालय में इसे लेकर आवेदन दाखिल करना चाहिए।
दरअसल, धर्मांतरण और ह्यूमन ट्रैफिकिंग मामले में गिरफ्तार तीन आरोपियों की जमानत को लेकर याचिका दुर्ग कोर्ट में दायर की गई थी, जिस पर जज ने सुनवाई करने से इंकार करते हुए कहा कि, यह हमारे क्षेत्राधिकार में नहीं है। अब NIA की विशेष कोर्ट में इसकी सुनवाई के लिए आवेदन दायर करना होगा।
न्यायालय के निर्देश की जानकारी देते हुए वकील ने बताया कि, ये मामला धर्मांतरण और ह्यूमन ट्रैफिकिंग का है, जो उनके क्षेत्राधिकार में नहीं आता है, इसके लिए सक्षम न्यायालय NIA कोर्ट बिलासपुर में याचिका दायर करनी होगी। कोर्ट ने कहा कि, प्रकरण को वापस ले लीजिए, नहीं तो याचिका खारिज करनी होगी। इस पूरे मामले में याचिकाकर्ता अगर हाईकोर्ट में याचिका दायर करना चाहते हैं, तो भी उन्हें पहले NIA कोर्ट में अपनी याचिका दायर करनी होगी।
क्या है यह पूरा मामला?
छत्तीसगढ़ के दुर्ग रेलवे स्टेशन पर राजकीय रेलवे पुलिस ने प्रीति मैरी और वंदना फ्रांसिस के साथ सुकमन मंडावी नाम के शख्स को इस हफ्ते की शुरुआत में गिरफ्तार किया था। यह गिरफ्तारी एक स्थानीय व्यक्ति की शिकायत के आधार पर की गई थी।
दुर्ग पुलिस के अनुसार, ननों पर नारायणपुर की युवतियों को नौकरी के बहाने गुमराह करने और संदिग्ध गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। इस मामले में जांच जारी है और पुलिस सभी पहलुओं की गहन पड़ताल कर रही है। स्थानीय लोगों और प्रशासन का कहना है कि छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण और मानव तस्करी जैसे मुद्दों पर सख्ती बरती जाएगी। यह विवाद तब और गहरा गया, जब सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर पक्ष-विपक्ष में बहस शुरू हो गई थी।
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