रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित जग्गी हत्याकांड मामले में सर्वोच्च न्यायालय के एक ऐतिहासिक फैसले पर सुनवाई हुई, जिसमें शीर्ष अदालत ने CBI की अपील स्वीकार कर इसे छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट वापस भेजने का आदेश दिया है, ताकि वहां मामले की मेरिट पर पूरी तरह से सुनवाई की जा सकें। वहीं, राज्य सरकार और पीड़ित पक्ष के सतीश जग्गी (रामअवतार जग्गी के पुत्र) की याचिकाएं खारिज कर दी है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने सुनाया है।
यह आदेश उच्च न्यायालय के उस पूर्व के फैसले को बरकरार रखता है, जिसमें अमित जोगी की दोषमुक्ति को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं (छत्तीसगढ़ राज्य, CBI और सतीश जागी द्वारा दायर) को खारिज कर दिया गया था। सर्वोच्च न्यायालय ने अब उच्च न्यायालय के इस फैसले को राज्य और जोगी के संदर्भ में पूर्ण रूप से बरकरार रखा है।
क्या था जग्गी हत्याकांड
रायपुर में वर्ष 2003 को NCP नेता रामअवतार जग्गी की हत्या कर दी गई थी। प्रारंभिक जांच राज्य पुलिस ने की थी, लेकिन बाद में मामले में असंतोष जताने के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने जांच CBI को सौंप दी थी। CBI की जांच में आरोप लगाए गए कि, अमित ऐश्वर्य जोगी (पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र) और अन्य कई लोग हत्या और साजिश में शामिल थे। हालांकि, 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था, जबकि अन्य 28 आरोपियों को दोषी ठहराया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अमित जोगी, राज्य सरकार और पीड़ित सतीश जग्गी तीनों पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया जाए।
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय यह स्पष्ट करता है कि जब किसी आपराधिक मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी (सीबीआई) को सौंपी जाती है, तो आगे की अपील का अधिकार राज्य सरकार के बजाय केंद्र सरकार के पास होता है। इस फैसले से छत्तीसगढ़ में लंबे समय से विवादास्पद रहे रामअवतार जग्गी हत्याकांड की कानूनी लड़ाई में नई दिशा मिली है और अब हाईकोर्ट में मामले की मूल बातें और सबूतों की पूरी तरह से समीक्षा होगी।
ऐतिहासिक जीत- अमित जोगी
वहीं, इस फैसले के बाद अमित जोगी ने कहा कि, यह न्याय की एक ऐतिहासिक जीत है। सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले ने न केवल मेरी निर्दोषता पर एक और मुहर लगा दी है, बल्कि भारतीय न्याय प्रणाली में मेरे अटूट विश्वास को भी स्थापित किया है। यह फैसला साबित करता है कि सत्य और न्याय की अंततः जीत होती है। मैं अपने परिवार, मित्रों और विशेष रूप से मेरी कानूनी टीम का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं, जिन्होंने इस लंबी कानूनी लड़ाई में मेरा साथ दिया।
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