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मालेगांव ब्लास्ट केस में 17 वर्ष बाद आया फैसला, सभी अभियुक्त बरी, सबूत नहीं मिलें

 Newsbaji  |  Jul 31, 2025 12:55 PM  | 
Last Updated : Jul 31, 2025 12:55 PM
साध्वी प्रज्ञा-कर्नल पुरोहित समेत सभी 7 आरोपी बरी- मुंबई स्पेशल कोर्ट
साध्वी प्रज्ञा-कर्नल पुरोहित समेत सभी 7 आरोपी बरी- मुंबई स्पेशल कोर्ट

मुंबई। मालेगांव बम विस्फोट मामले में विशेष NIA अदालत ने सभी सात अभियुक्तों को बरी कर दिया है। करीब 17 साल पुराने इस मामले में मालेगांव में बम धमाकों में छह लोगों की मौत हुई थी और 100 से ज़्यादा लोग घायल हुए थे। भाजपा नेता साध्वी प्रज्ञा और लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित इस मामले में सबसे चर्चित अभियुक्त रहे। साध्वी प्रज्ञा भोपाल से सांसद भी रह चुकी हैं।

जानकारी के अनुसार, 29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में एक मस्जिद के पास खड़ी मोटरसाइकिलों में रखें विस्फोटकों में धमाका हुआ था। मुकदमे के दौरान सरकारी पक्ष ने 323 गवाहों से पूछताछ की, जिनमें से 37 अपने बयान से मुकर गए थे। बाद में इस मामले की जांच की ज़िम्मेदारी एनआईए को सौंप दी गई थी।

इस मामले में लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, भाजपा नेता प्रज्ञा ठाकुर, मेजर रमेश उपाध्याय (सेवानिवृत्त), अजय राहिरकर, सुधाकर द्विवेदी, सुधाकर चतुर्वेदी और समीर कुलकर्णी के ख़िलाफ़ गैरक़ानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) और भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत मामला दर्ज किया गया था। शुरुआत में इस मामले की जांच महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) कर रहा था, लेकिन 2011 में इसकी जांच की ज़िम्मेदारी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी गई थी।

मालेगांव ब्लास्ट मामला
महाराष्ट्र के मालेगांव में अंजुमन चौक और भीकू चौक के बीच शकील गुड्स ट्रांसपोर्ट के सामने 29 सितंबर 2008 की रात 9.35 बजे बम धमाका हुआ था, जिसमें छह लोग मारे गए और 101 लोग घायल हुए थे। इस धमाके में एक मोटरसाइकिल इस्तेमाल की गई थी। एनआईए की रिपोर्ट के मुताबिक यह मोटरसाइकिल प्रज्ञा ठाकुर के नाम पर थी। महाराष्ट्र एटीएस ने हेमंत करकरे के नेतृत्व में इसकी जांच की और इस नतीजे पर पहुंची कि उस मोटरसाइकिल के तार गुजरात के सूरत और अंत में प्रज्ञा ठाकुर से जुड़े थे। प्रज्ञा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की सदस्य रह चुकी थीं। पुलिस ने पुणे, नासिक, भोपाल इंदौर में जांच की। सेना के एक अधिकारी कर्नल प्रसाद पुरोहित और सेवानिवृत मेजर रमेश उपाध्याय को भी गिरफ्तार किया गया था।
 

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