पटना। बिहार में पटना के गांधी मैदान में नीतीश कुमार 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनके साथ दो उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा ने भी शपथ ली। नीतीश कुमार के नए मंत्रिमंडल में कुल 26 मंत्री शामिल हैं, जिनमें से 12 पर आपराधिक केस दर्ज हैं। सबसे अधिक आपराधिक केस भाजपा कोटे के मंत्रियों पर हैं। भाजपा कोटे से नीतीश सरकार में 02 उपमुख्यमंत्री समेत 14 मंत्री हैं, जिनमें से 9 पर आपराधिकमामले पंजीबद्ध हैं।
नीतीश कुमार ने गुरुवार को जदयू, हम और लोजपा (R) के एक‑एक मंत्रियों पर आपराधिक केस दर्ज है। मंत्रिमंडल में सबसे अधिक पढ़े‑लिखे मंत्री अशोक चौधरी, दिलीप जायसवाल और संतोष सुमन हैं, जिन्होंने PHD की हुई है। जबकि नारायण प्रसाद सबसे कम शिक्षा प्राप्त हैं, उन्होंने केवल 10वीं तक ही पढ़ाई की है।
करोड़पति विधायक व मंंत्री
वहीं, नीतीश कैबिनेट में शामिल मंत्रियों की संपत्ति का विवरण सामने आया है, जिसमें सबसे अमीर मंत्री संजय कुमार सिंह हैं। सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर से लोजपा (R) के विधायक संजय सिंह के पास 45.21 करोड़ रुपए की संपत्ति है. दूसरे स्थान पर मुजफ्फरपुर के औराई से भाजपा विधायक रमा निषाद हैं, जिनकी संपत्ति 31.86 करोड़ रुपए बताई गई है। तीसरे स्थान पर लखीसराय से भाजपा के विजय कुमार सिन्हा हैं, जिनके पास 11.62 करोड़ रुपए की संपत्ति दर्ज है। मुंगेर के तारापुर से भाजपा नेता सम्राट चौधरी की कुल संपत्ति 11.34 करोड़ रुपए है।
मंत्रियों के नाम व अन्य जानकारी
1. सम्राट चौधरी जो, तारापुर से विधायक है, उनको उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। सम्राट चौधरी राजनीतिक परिवार से संबंध रखते हैं। उनके पिता शकुनी चौधरी राजद, कांग्रेस और समता पार्टी से कई बार विधायक रहे हैं और राबड़ी देवी सरकार में वे मंत्री भी थे। इसके अलावा, उनकी मां पार्वती देवी भी तारापुर से विधायक रही हैं।
2. नितिन नवीन, नीतीश सरकार के अगले मंत्री नितिन नवीन के पिता नवीन किशोर प्रसाद भाजपा के कद्दावर नेता रहे थे। उनके निधन के बाद उपचुनाव में लोगों ने नितिन नवीन पर भरोसा जताया। यह वही समय था, जब नितिन का राजनीतिक सफर शुरू हुआ। नवीन किशोर पटना पश्चिम विधानसभा सीट से 4 बार भाजपा के विधायक रहे हैं।
3. अशोक चौधरी जो, अशोक चौधरी के पिता महावीर चौधरी कांग्रेस के बड़े नेता थे। वे बिहार सरकार में मंत्री भी रहे थे। वहीं अशोक चौधरी की बेटी शांभवी भी समस्तीपुर से लोजपा (R) की सांसद हैं।
4. श्रेयसी सिंह, नीतीश कैबिनेट में मंत्री श्रेयसी सिंह के पिता दिग्विजय सिंह केंद्रीय नेता थे। वे पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेहद करीबी भी थे। दिग्विजय सिंह के निधन के बाद उनकी राजनीतिक विरासत को उनकी पत्नी ने संभाला था। अब उनकी विरासत को बेटी श्रेयसी सिंह आगे बढ़ा रही हैं।
5. संतोष कुमार सुमन, HAM कोटे से मंत्री केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी के पुत्र हैं। जीतनराम मांझी बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।
6. दीपक प्रकाश, RLM के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने अपने विधायकों के बजाय अपने बेटे पर विश्वास जताया है। RLM कोटे से दीपक प्रकाश को मंत्री बनाया गया है। दीपक चुनाव तो नहीं लड़े फिर भी मंत्री बन गए। हालांकि इससे पहले कयास लगाए जा रहे थे कि, उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता को मंत्री बनाया जा सकता है।
7. विजय कुमार चौधरी, JDU कोटे से मंत्री बनाया गया है। विजय कुमार चौधरी के पिता जगदीश प्रसाद कांग्रेस के नेता थे। उन्होंने दलसिंहसराय सीट से 03 बार चुनाव भी जीता था। उनके निधन के बाद राजनीतिक विरासत बेटे विजय चौधरी ने संभाली है। हालांकि वे कांग्रेस छोड़कर जेडीयू में शामिल हो गए।
8. लेशी सिंह, वर्ष 2000 में पति बूटन सिंह की हत्या के बाद लेशी सिंह ने राजनीति में प्रवेश किया। बूटन सिंह राजनेता थे और समता पार्टी के जिलाध्यक्ष भी रहे थे।
9. रमा निषाद, भाजपा कोटे से रमा निषाद को मंत्री बनाया गया है। रमा के पति अजय निषाद मुजफ्फरपुर से सांसद रह चुके हैं। इसके अलावा, ससुर कैप्टन जय नारायण निषाद भी 4 बार सांसद रहे थे।
10. सुनील कुमार, JDU कोटे से मंत्री ने रिटायरमेंट के बाद राजनीति में प्रवेश किया है। उनके पिता चंद्रिका राम राजनेता रहे थे। वे बिहार सरकार में मंत्री रहे थे।
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