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सी.पी.राधाकृष्णन देश के 15वें उपराष्ट्रपति, चुनाव में किन 14 सांसदों ने बिगाड़ा विपक्ष का गणित, आइए जानते है

 Newsbaji  |  Sep 10, 2025 08:44 AM  | 
Last Updated : Sep 10, 2025 08:44 AM
उपराष्ट्रपति के चुनाव में सी.पी.राधाकृष्णन जीतें, बी.सुदर्शन रेड्डी को हार का मुंह देखना पड़ा।
उपराष्ट्रपति के चुनाव में सी.पी.राधाकृष्णन जीतें, बी.सुदर्शन रेड्डी को हार का मुंह देखना पड़ा।

दिल्ली। NDA उम्मीदवार सी.पी.राधाकृष्णन उपराष्ट्रपति चुन लिए गए है। NDA को 452 वोट मिलें, जबकि विपक्षी INDIA उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को 300 वोट ही मिलें। सवाल है कि, आखिर NDA के पक्ष में 438 सांसदों का ही समर्थन था तो बाकी 14 वोट कहां से आए?

अंतरात्मा की आवाज पर मतदान

उपराष्ट्रपति चुनाव में संख्या बल की दृष्टि से तय हार के बावजूद INDIA ब्लॉक की रणनीति विपक्षी एकजुटता साबित करने और सेंधमारी के सहारे सत्तारूढ़ NDA के खेमे में सियासी हलचल मचाने की थी। हालांकि नतीजे बताते हैं कि विपक्ष, सत्तारूढ़ NDA के खेमे में सेंधमारी तो दूर अपना ही घर नहीं संभाल पाया। अंतरात्मा की आवाज पर मतदान करने की अपील भी विपक्ष पर ही भारी पड़ गई और उसके 14 सदस्यों ने क्रॉस वोटिंग कर दी।

कांग्रेस ने इस चुनाव में संविधान बचाने को प्रमुख मुद्दा बनाते हुए मतदाताओं से अंतरात्मा की आवाज पर वोट करने की अपील की थी। पार्टी को लगता था कि तेलुगु पृष्ठभूमि के रेड्डी को उम्मीदवार बनाने के कारण तेलुगु गौरव के नाम पर तेलंगाना में BRS और आंध्र प्रदेश में TDP के समक्ष असमंजस की स्थिति उत्पन्न होगी। हालांकि उसका यह दांव तब फेल हो गया, जब BRS ने राजनीतिक कारणों से मतदान से दूरी बना ली, जबकि TDP और जनसेना ने NDA उम्मीदवारों के पक्ष में मत दिया।

इस जीत के माध्यम से भाजपा केंद्र सरकार के भविष्य में स्थिर रहने और गठबंधन में शामिल दलों में एकजुटता कायम रखने का सियासी संदेश देने में सफल रही है। दूसरी ओर विपक्ष क्रॉस वोटिंग और अमान्य घोषित किए गए वोट के कारण आपसी एकजुटता का संदेश देने में नाकाम साबित हुई है।

अमान्य वोटों पर उठे सवाल 
उपराष्ट्रपति के चुनाव में 15 वोट अमान्य घोषित किए गए हैं। सूत्रों के हवाले से बता चला है कि, इनमें ज्यादातर कांग्रेस और कुछ समाजवादी पार्टी के भी सांसद शामिल हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या जानबूझ कर कुछ सांसदों ने मतदान के लिए अलग स्याही वाली कलम का इस्तेमाल तो नहीं किया? गौरतलब है कि, इस चुनाव में व्हिप जारी नहीं होने के कारण क्रॉस वोटिंग या संबंधित दल या गठबंधन के प्रत्याशी को वोट नहीं देने के कारण संसद की सदस्यता पर तलवार लटकने का खतरा तो था नहीं।

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