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केन्द्र सरकार ला रही 'सहकार टैक्सियां', OLA-UBER की होगी छुट्टी! अमित शाह ने जारी की पॉलिसी

 Newsbaji  |  Jul 25, 2025 09:00 AM  | 
Last Updated : Jul 25, 2025 09:00 AM
मोदी सरकार का सहकारिता पर फोकस, नई नीति-2025
मोदी सरकार का सहकारिता पर फोकस, नई नीति-2025

दिल्ली। केन्द्र सरकार सहकारिता पर फोकस करने की तैयारी में है। यहीं वजह है कि, देश के हर गांव में कम से कम एक सहकारी समिति खुलेगी और हर तहसील में पांच-पांच मॉडल सहकारी गांव बनेंगे। साथ ही सब कुछ योजनानुसार चला तो साल के अंत में कई शहरों में ओला-ऊबर (OLA-UBER) की तरह 'सहकार टैक्सियां' चलने लगेंगी। 

लॉच की नई पॉलिसी
सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को अक्षय ऊर्जा भवन में नई सहकारी नीति-2025 को लांच करते हुए कहा कि, वर्ष 2020 से पहले कुछ लोगों ने सहकारिता को मृतप्राय क्षेत्र घोषित कर दिया था। लोग कहते थे, 'सहकारिता का फ्यूचर नही है', आज मैं कहता हूं 'सहकारिता का ही फ्यूचर है।' नई नीति में 2025 के तहत देश में 50 करोड़ लोगों को सहकारिता से जोड़कर उन्हें सक्रिय सदस्य बनाने की तैयारी है। रोजगार की दिशा में यह अब तक का सबसे बड़ा क्रांतिकारी कदम होगा। 

केन्द्र सरकार का लक्ष्य है कि, वर्ष 2034 तक सहकारिता से देश की GDP में तीन गुना योगदान बढ़ाया जाए। शाह ने कहा कि, वर्ष 2002 के बाद 2025 में भी भाजपा सरकार ही नई सहकारिता नीति लाई है। नई नीति आने वाले 25 वर्ष तक सहकारिता क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करेगी।

सहकारिता क्षेत्र में गहरा अनुभव रखने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु के नेतृत्व वाली 40 सदस्यों की समिति ने नेताओं, विशेषज्ञों और शिक्षाविदों से बात कर यह नीति तैयार की है। समिति को 750 सुझाव मिलें और फिर RBI और नाबार्ड के साथ मीटिंग कर समिति ने नीति को अंतिम रूप दिया है।

सहकारी समितियों से सब मिलेगा
नीति के अनुसार गांव-गांव खुलने वाली प्राथमिक ऋण सहकारी समितियों (पैक्स) पर दवा, डीजल-पेट्रोल और LPG  सब कुछ मिलेगा। अब तक 4108 पैक्स को जन औषधि केंद्र खोलने की अनुमति मिल चुकी है। 393 पैक्स ने पेट्रोल और डीज़ल के रिटेल आउटलेट तो 100 से अधिक पैक्स ने LPG वितरण के लिए आवेदन किया है।

इन पर फोकस
- प्रत्येक पंचायत में कम से कम एक प्राथमिक सहकारी इकाई
- कंप्यूटरीकरण से पारदर्शिता को बढ़ावा
- सहकारी समितियों के लिए एक क्लस्टर और मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित होगा
- हर 10 साल में कानून में आवश्यक बदलाव की व्यवस्था
- मौजूदा 8.30 लाख समितियों में 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी
- सहकारिता उत्पादों का होगा निर्यात, तंत्र विकसित होगा

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