बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में एक बार फिर साइबर ठगों ने एक बड़ी घटना को अंजाम दिया है। इस बार ठगी का शिकार हुआ 68 वर्षीय बुजुर्ग हुआ है, जिन्हें दो दिन तक डिजिटल अरेस्ट की झूठी कहानी में फंसाकर 57 लाख रुपए की ठगी कर ली।
जानिए पूरी कहानी
यह मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र का है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, बुजुर्ग को कुछ दिन पहले एक अज्ञात नंबर से फोन आया था। कॉलर ने खुद को दिल्ली पुलिस का अफसर बताया और कहा कि, एयरवेज कंपनी के नरेश गोयल को फर्जी लेनदेन के मामले में गिरफ्तार किया गया है, उसके खाते के साथ आपके बैंक खाते का नाम जुड़ा है। जब बुजुर्ग ने किसी भी गोयल को न जानने की बात कही, तो ठग ने उन्हें धमकाते हुए कहा कि, अब पुलिस ही जानेगी तुम्हे।
57 लाख की रकम को किया ट्रांसफर
ठगों ने झांसे में लेकर कहा कि, अगर किसी प्रकार की कार्रवाई से बचना चाहते हो, तो अपने खाते की पूरी रकम सुरक्षित जांच खाते में ट्रांसफर कर दो। ठग ने यह भी दावा किया कि, यह पूरा मामला RBI के पास जांच के लिए गया हुआ है और रुपए जल्द वापस कर दिए जाएंगे। बुजुर्ग ने डर के चलते ठगों के द्वारा बताए गए बैंक खातों में RTGS के जरिए दो चरणों में पहले 50 लाख और फिर 7 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए।
अब पुलिस कर रही जांच
जब कई दिनों बाद भी राशि वापस नहीं मिली और कॉलर का नंबर भी बंद हो गया, तब बुजुर्ग को ठगी होने का अहसास हुआ। उन्होंने, बिलासपुर के सिविल लाइन थाने में आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की विवेचना में जुट गई है।
डिजिटल अरेस्ट- एक प्रकार का स्कैम
यह एक प्रकार की साइबर ठगी है। यह लोगों का शोषण करने के लिए एक नया और खतरनाक तरीका है। इस शब्दावली के दो हिस्से हैं, डिजिटल अरेस्ट और स्कैम या ठगी। इससे पहले की हम डिजिटेल अरेस्ट को समझें, यहां यह जानना बहुत जरूरी है कि, कानून में इस तरह का कोई शब्द नहीं है। डिजिटल अरेस्ट साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली एक भ्रामक रणनीति है।
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