बस्तर। छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान के तहत पहली बार नक्सली संगठन ने हथियारबंद संघर्ष छोड़ने की बात कही है। दरअसल, ऐसा इस लिए हुआ कि, लगातार चल रही कार्रवाई के बाद नक्सली संगठन ने प्रेस रिलीज जारी की है। इसमें दावा किया गया है कि, संगठन हथियार छोड़कर शांतिवार्ता के लिए तैयार है। हालांकि, इसके लिए उन्होंने शर्त रखी है कि, पहले सरकार सीजफायर का ऐलान करें।
दरअसल, जो लेटर वायरल हो रहा है, वह कम्युनिस्ट पार्टी माओवादी की तरफ से जारी किया है। खास बात यह है कि, इस तरह का पत्र पहली बार नक्सली संगठन की केंद्रीय समिति ने जारी किया है। यह पत्र 15 सितंबर 2025 को लिखा गया और अब यह वायरल हो रहा है।


वीडियो कॉल से बातचीत की मांग
नक्सलियों के द्वारा जारी पत्र में लिखा है कि, संगठन हथियारबंद संघर्ष को अस्थाई रूप से त्याग कर भारत की उत्पीड़ित जनता की समस्याओं के समाधान के लिए जन संघर्षों में शामिल होगा। साथ ही सरकार से वीडियो कॉल के जरिए बातचीत करने की भी पेशकश की गई है। पत्र में एक माह के औपचारिक सीजफायर की मांग की गई है ताकि शांति प्रक्रिया आगे बढ़ाई। यह पत्र15 अगस्त 2025 को लिखा गया था, लेकिन हालात सामान्य होने की उम्मीद में इसे सार्वजनिक नहीं किया गया। इस बीच एक माह में संगठन को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। 03 सी.सी मेंबर बाहर हो गए, पहला गरियाबंद में मारा गया, दूसरा झारखंड में मारा गया और तीसरा तेलंगाना में सरेंडर कर दिया। इसी दबाव और कई नेताओं के सरेंडर मूड में होने के कारण यह पत्र आनन-फानन में सामने आया है।
बता दे कि, बस्तर और आसपास के क्षेत्रों में जहां पिछले 04 दशक से नक्सलियों का कब्जा था, वहां सुरक्षा बलों ने नए कैंप खोले और लगातार ऑपरेशन चलाने का काम किया है। इसके चलते बड़ी संख्या में नक्सली सरेंडर कर रहे हैं और कई मारे जा रहे हैं। गरियाबंद में 01 करोड़ का ईनामी सी.सी मेंबर बालकृष्णा उर्फ मनोज, तेलंगाना में 01 करोड़ की ईनामी सुजाता और झारखंड में 01 करोड़ का ईनामी सहदेव सोरेन उर्फ प्रवेश ने सरेंडर किया है।
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