रायपुर। छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले में गिरफ्तार पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को जेल भेज दिया गया है। ईडी की 5 दिनों की रिमांड खत्म होने के बाद, उन्हें रायपुर की विशेष कोर्ट में पेश किया गया था। जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर केन्द्रीय जेल रायपुर भेज दिया गया है।
बता दें कि, ईडी ने 18 जुलाई की सुबह भिलाई स्थित भूपेश बघेल के निवास पर छापा मारकर चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया था। उन पर छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। मामले में पूछताछ के लिए कोर्ट ने उन्हें 5 दिन की रिमांड पर भेजा था। रिमांड खत्म होने पर आज उन्हें दोबारा कोर्ट में पेश किया गया था।
ईडी का खुलासा
दरअसल, 21 जुलाई को ईडी रायपुर जोनल कार्यालय की ओर से प्रेस नोट में दी गई जानकारी के अनुसार, ईडी ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को 18 जुलाई को धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत गिरफ्तार किया। शराब घोटाले की जांच ईडी ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत एसीबी/ईओडब्ल्यू रायपुर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस घोटाले के कारण प्रदेश के खजाने को भारी नुकसान हुआ और करीब 2500 करोड़ रुपए की अवैध कमाई (POC) घोटाले से जुड़े लाभार्थियों की सीधे जेब में गई।
चैतन्य को 16.70 करोड़ नगद मिलें
ईडी की जांच से पता चला है कि, चैतन्य बघेल को 16.70 करोड़ रुपए की POC प्राप्त हुई थी। उन्होंने उक्त POC को मिलाने के लिए अपनी रियल एस्टेट फर्मों का इस्तेमाल किया था। यह पता चला है कि, उन्होंने पीओसी की उक्त नकद राशि का उपयोग अपने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के विकास में किया था। पीओसी का उपयोग उनके प्रोजेक्ट के ठेकेदार को नकद भुगतान, नकदी के खिलाफ बैंक प्रविष्टियों आदि के माध्यम से किया गया था।
उन्होंने त्रिलोक सिंह ढिल्लो के साथ भी मिलीभगत की और अपनी कंपनियों का उपयोग एक योजना तैयार करने के लिए किया जिसके अनुसार उन्होंने त्रिलोक सिंह ढिल्लो के कर्मचारियों के नाम पर अपने “विठ्ठलपुरम प्रोजेक्ट” में फ्लैटों की खरीद की आड़ में अप्रत्यक्ष रूप से 5 करोड़ रुपए प्राप्त किए। बैंकिंग ट्रेल है जो इंगित करता है कि लेन-देन की प्रासंगिक अवधि के दौरान, त्रिलोक सिंह ढिल्लों ने अपने बैंक खातों में शराब सिंडिकेट से भुगतान हुआ।
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