भिलाई। भिलाई नगर निगम के 70 वार्डों में आरक्षण की तस्वीर साफ होते ही आगामी नगरीय निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। आरक्षण बदलने के साथ ही भाजपा और कांग्रेस ने अब वार्डवार प्रत्याशियों की तलाश शुरू कर दी है। दोनों दल संभावित उम्मीदवारों की जमीनी पकड़, जनसंपर्क, संगठन में सक्रियता और स्थानीय स्वीकार्यता का फीडबैक जुटा रहे हैं। माना जा रहा है कि सर्वे रिपोर्ट और संगठन से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर टिकट के दावेदारों के नामों पर मंथन होगा।
आरक्षण ने बदले कई मौजूदा पार्षदों के समीकरण
भिलाई के 70 वार्डों में 23 वार्ड OBC, 9 SC और 3 ST वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं। वहीं 24 वार्ड अनारक्षित रखे गए हैं। इनमें 11 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। आरक्षण की नई व्यवस्था ने कई मौजूदा पार्षदों की चुनावी तैयारी का गणित बदल दिया है। जिन पार्षदों के वर्तमान वार्ड में उनके लिए चुनाव लड़ने की स्थिति नहीं बन रही है, वे अब आरक्षण के अनुरूप दूसरे वार्डों में संभावनाएं तलाश रहे हैं। इससे कई वार्डों में पुराने दावेदारों के साथ नए चेहरों की दावेदारी भी सामने आने लगी है।
दावेदारों ने बढ़ाया जनसंपर्क
आरक्षण जारी होने के बाद टिकट के इच्छुक नेताओं की सक्रियता बढ़ गई है। संभावित प्रत्याशी अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों से संपर्क कर रहे हैं और स्थानीय स्तर पर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं।
भाजपा और कांग्रेस संगठन भी दावेदारों की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं। क्षेत्र में उनकी सक्रियता, मतदाताओं से संपर्क, पार्टी कार्यक्रमों में भागीदारी और स्थानीय स्तर पर स्वीकार्यता जैसे पहलुओं की जानकारी जुटाई जा रही है।
एक वार्ड में कई दावेदार तो बढ़ेगी टिकट की चुनौती
कुछ वार्डों में टिकट के लिए एक से अधिक दावेदार सामने आने से दोनों प्रमुख दलों के सामने प्रत्याशी चयन की चुनौती बढ़ गई है। संगठन के सामने केवल जीत की संभावना वाले चेहरे की तलाश ही नहीं, बल्कि टिकट नहीं मिलने वाले दावेदारों को साथ बनाए रखने की चुनौती भी रहेगी। खासकर उन वार्डों में स्थिति महत्वपूर्ण होगी, जहां कई प्रभावशाली स्थानीय नेता टिकट की दौड़ में शामिल हैं।
टिकट कटा तो निर्दलीय मैदान में उतरने का खतरा
नगर निगम चुनाव में राजनीतिक दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक अंदरूनी असंतोष भी हो सकता है। टिकट से वंचित दावेदारों के निर्दलीय चुनाव लड़ने की स्थिति में अधिकृत प्रत्याशी के सामने चुनौती बढ़ सकती है। ऐसे में प्रत्याशी घोषित करने के बाद पार्टी संगठन को असंतुष्ट दावेदारों और उनके समर्थकों को साधने पर भी जोर देना होगा। चुनावी मुकाबले में बागी या निर्दलीय उम्मीदवारों की भूमिका कुछ वार्डों में महत्वपूर्ण हो सकती है।
मौजूदा परिषद में कांग्रेस का दबदबा, भाजपा और निर्दलीयों की भी मौजूदगी
70 सदस्यीय मौजूदा नगर निगम में कांग्रेस के 37, बीजेपी के 24 और निर्दलीय 9 पार्षद हैं। इस लिहाज से वार्डवार राजनीतिक समीकरणों को समझना दोनों प्रमुख दलों के लिए महत्वपूर्ण होगा। जिन वार्डों में मजबूत निर्दलीय दावेदार पहले से सक्रिय हैं, वहां बीजेपी और कांग्रेस प्रत्याशी चयन के दौरान स्थानीय समीकरणों को भी ध्यान में रख सकते हैं।
सर्वे रिपोर्ट बताएगी किस पर जताया जाएगा भरोसा
अब दोनों दलों का फोकस वार्डवार संभावित प्रत्याशियों की पहचान पर है। सर्वे और संगठन से मिलने वाले फीडबैक में सामने आने वाले नामों पर स्थानीय स्तर से लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं तक मंथन होगा।
इसके बाद प्रत्याशियों की सूची को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसी प्रक्रिया में यह भी साफ होगा कि मौजूदा पार्षदों में कितनों को दोबारा टिकट मिलता है और कितने वार्डों में नए चेहरों को मौका दिया जाता है।
आरक्षण के बाद बदले चुनावी समीकरणों के बीच अब भिलाई में असली राजनीतिक मुकाबला टिकट की दौड़ और दावेदारों की सक्रियता से शुरू हो गया है।
एक नजर में भिलाई नगर निगम
| स्थिति | संख्या |
| कुल वार्ड | 70 |
| OBC आरक्षित | 23 |
| SC आरक्षित | 09 |
| ST आरक्षित | 03 |
| अनारक्षित | 24 |
| अनारक्षित श्रेणी में महिला आरक्षित | 11 |
| कांग्रेस पार्षद | 37 |
| भाजपा पार्षद | 24 |
| निर्दलीय पार्षद | 09 |
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