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सोमवार से शुरू होगा विधानसभा का सत्र, 24 फरवरी को पेश होगा बजट, विधायकों ने लगाए 2813 सवाल

 Newsbaji  |  Feb 22, 2026 09:03 PM  | 
Last Updated : Feb 22, 2026 09:03 PM
छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र-2026-27 का आगाज
छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र-2026-27 का आगाज

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र 23 फरवरी से शुरू होने जा रहा है, जिसमें 24 फरवरी को वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया जाएगा। 15 बैठकों तक चलने वाले इस सत्र में विधायकों ने 2,813 सवाल लगाए हैं, वहीं पूर्व मंत्री कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट की शर्तों के तहत सदन में शामिल होने की अनुमति दी गई है।

2,813 सवाल लगाए गए
विधानसभा अध्यक्ष के अनुसार, विधायकों से कुल 2,813 प्रश्नों की सूचनाएं प्राप्त हुई हैं। इनमें:

  • 1,437 तारांकित प्रश्न
  • 1,376 अतारांकित प्रश्न शामिल हैं।
  • इसके अलावा, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के लिए 61 सूचनाएं प्राप्त हुई हैं। 

कवासी लखमा को सशर्त अनुमति

पूर्व आबकारी मंत्री और कोंटा से कांग्रेस विधायक कवासी लखमा को बजट सत्र में भाग लेने की सशर्त अनुमति दी गई है।
विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि शर्तों के अनुसार:

  • लखमा को अपने आगमन और प्रस्थान का सटीक समय विधानसभा सचिवालय को बताना होगा।
  • अपना चालू मोबाइल नंबर जमा करना होगा।
  • वे अपने निर्वाचन क्षेत्र का दौरा नहीं करेंगे।
  • कोई संवाददाता सम्मेलन आयोजित नहीं करेंगे।
  • उच्चतम न्यायालय की ‘नो स्पीच’ शर्त का कड़ाई से पालन करेंगे।
  • विधानसभा के भीतर या बाहर जारी जांच के गुण-दोषों पर चर्चा नहीं करेंगे।
  • उनकी उपस्थिति केवल सत्र अवधि तक सीमित रहेगी।
  • यदि वे शर्तों का उल्लंघन करते हैं, तो अनुमति तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी जाएगी।

3 फरवरी 2026 को मिली थी जमानत
इस वर्ष 3 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने लखमा को ईडी और छत्तीसगढ़ के भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो/आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा द्वारा अलग-अलग दर्ज किए गए दो मामलों में जमानत दी थी।

कुल मिलाकर छत्तीसगढ़ विधानसभा का यह बजट सत्र कई मायनों में अहम रहने वाला है। एक ओर जहां राज्य सरकार 2026-27 का बजट पेश कर अपनी आर्थिक प्राथमिकताओं की रूपरेखा स्पष्ट करेगी, वहीं विधायकों द्वारा लगाए गए 2,813 सवालों से सदन में व्यापक चर्चा और जवाबदेही की उम्मीद है। साथ ही, कवासी लखमा की सशर्त उपस्थिति सत्र को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण बना रही है। ऐसे में आगामी बैठकों पर प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।

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