नेशनल डेस्क. लोकसभा चुनाव 2024 में बीजेपी फिर सत्ता में तो आई है और पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकार भी बनाने जा रही है. लेकिन इस बार गठबंधन के सहारे. सहयोगी भी कौन, नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू. दोनों को वैसे तो सब जानते हैं पलटूराम के रूप में. लेकिन, हम बताने जा रहे हैं उन किस्सों के बारे में जिन्होंने साबित किया कि ये सच में पलटूराम ही हैं. साथ रहकर भी धोखा देते रहे हैं और कह सकते हैं कि साथी रहकर भी टॉम एंड जेरी जैसी हरकतें करते रहे हैं.
कहानी चंद्र बाबू की...
शुरुआत करते हैं चंद्रबाबू नायडू से. आंध्रप्रदेश की क्षेत्रीय पार्टी तेलुगु देसम पार्टी के कर्ताधर्ता हैं और अभी एनडीए गठबंधन के अहम सहयोगी. इसी पार्टी से वाजपेयी सरकार में स्पीकर चुने गए बालयोगी के चलते वाजपेयी को फ्लोर टेस्ट में फेल होना पड़ा था और सरकार 13 महीने में गिर गई थी.
दरअसल, ओडिशा से सांसद गिरधर गमांग तब ओडिशा के सीएम बन गए थे, लेकिन सांसद पद से इस्तीफा अभी नहीं दिया था. फ्लोर टेस्ट की बारी आई तो वे वोट देने पहुंचे. इसका विरोध हुआ तो पूरा मामला स्पीकर के कंधे पर आ गया. अंतत: बालयोगी ने इसे गमांग के विवेक पर छोड़ दिया. गमांग ने वाजपेयी के खिलाफ वोट किया और सरकार एक वोट से गिर गई.
गोधरा कांड के बाद टीडीपी ने कराई किरकिरी
साल 2002 में गोधरा कांड हुआ और फिर गुजरात में दंगे शुरू हो गए. इसमें दंगाइयों के खिलाफ सख्ती नहीं करने का आरोप तत्कालीन सीएम और वर्तमान में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मत्थे मढ़ा गया. वाजपेयी सरकार से मांग की गई कि मोदी को मुख्यमंत्री पद से हटाया जाए. विरोध करने वालों में विरोधियों के अलावा सहयोगी के रूप में शामिल टीडीपी यानी चंद्रबाबू नायडू की पार्टी भी शामिल थी. गठबंधन तब तो नहीं छोड़ा लेकिन, जब 2004 में एनडीए की सरकार नहीं बनी और आंध्रप्रदेश से भी नायडू हार गए तो फिर गठबंधन भी छोड़ दिया.
2014 में साथ आए, 18 में छोड़ दिया
साल 2014 के लोकसभा चुनाव में फिर एनडीए की सरकार बनी और नरेंद्र मोदी पहली बार पीएम बने तो चंद्रबाबू नायडू भी गठबंधन में शामिल थे, लेकिन ये साथ 4 साल ही चला और 2018 में आंध्रप्रदेश की अनदेखी का आरोप लगाकर साथ छोड़ गए. वहीं अब इस बार इस गठबंधन के अहम सहयोगी के रूप में साथ हैं.
दास्तान ए सुशासन बाबू: जब गुजरात मॉडल से चिढ़ गए
13वीं लोकसभा की वाजपेयी सरकार में नीतीश की पार्टी सरकार के साथ थी. उनके सांसद जार्ज फर्नांडिस रक्षामंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद पर रहे. साथ ठीक चल रहा था लेकिन 2004 के चुनाव में एनडीए गठबंधन चुनाव हार गया. फिर जब 2009 में लोकसभा चुनाव हुआ तो बीजेपी ने गुजरात मॉडल को सामने लाने का प्रयास शुरू कर दिया. यानी तत्कालीन गुजरात सीएम नरेंद्र मोदी का महिमा मंडन शुरू हो गया.
तब सुशासन बाबू के नाम से बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश को ये बुरा लगा. वे इसकी खिलाफत करते रहे. 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद मोदी के पीएम बनने की बात आई तो उन्होंने किनारा ही कर लिया. इसके बाद वे बार-बार इधर-उधर होते रहे. कभी लालू के साथ सरकार बनाई तो कभी बीजेपी के साथ. इंडिया गठबंधन में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई. फिर उसे ही छोड़ दिया. अब एनडीए के साथ हैं.
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