दिल्ली। नेपाल में जेन जी आंदोलन की वजह से हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। विरोध प्रदर्शनों के बीच प्रधानमंत्री के.पी शर्मा ओली ने इस्तीफा दें दिया था। नेपाल के स्वास्थ्य मंत्रालय ने पुष्टि की है कि, इन विरोध प्रदर्शनों में अब तक 30 लोगों की जान जा चुकी है।
मिली जानकारी के अनुसार, बुधवार शाम जारी मंत्रालय के बयान के अनुसार, अब तक 1061 लोग घायल हुए हैं। घायलों में से 719 को छुट्टी दे दी गई है, जबकि 274 लोग अब भी अस्पताल में इलाज किया जा रहा है। इसी बीच जेन जी आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने नेपाल की सुप्रीम कोर्ट की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाने का प्रस्ताव रखा है और काठमांडू के मेयर बालेन शाह ने भी उनका समर्थन किया है।
कौन है सुशीला कार्की?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुशीला कार्की ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से राजनीति शास्त्र में मास्टर्स किया है। उन्होंने 1979 में वकालत में अपना करियर शुरू किया था। सुशीला कार्की 11 जुलाई 2016 से 6 जून 2017 तक नेपाल की मुख्य न्यायाधीश थीं। अप्रैल 2017 में उस समय की सरकार ने संसद में उनके ख़िलाफ़ महाभियोग प्रस्ताव रखा। आरोप लगाया गया कि उन्होंने पक्षपात किया और सरकार के काम में दखल दिया। प्रस्ताव आने के बाद जांच पूरी होने तक उन्हें मुख्य न्यायाधीश के पद से निलंबित कर दिया गया। इस दौरान जनता ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता के समर्थन में आवाज़ उठाई और सुप्रीम कोर्ट ने संसद को आगे की कार्रवाई से रोक दिया। बढ़ते दबाव के बीच कुछ ही हफ्तों में संसद को प्रस्ताव वापस लेना पड़ा। इस घटना से सुशीला कार्की की पहचान एक ऐसी न्यायाधीश के रूप में बनी, जो सत्ता के दबाव में नहीं झुकती।
भारत के साथ पर सुशीला कार्की का रिश्ता
एक निजी टीवी चैनल पर दिए इंटरव्यू में जब उनसे भारत से जुड़ाव के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "हां, मैंने BHU में पढ़ाई की है। वहां की बहुत सी यादें हैं। मैं अपने शिक्षकों, दोस्तों को आज भी याद करती हूं। गंगा नदी, उसके किनारे हॉस्टल और गर्मियों की रातों में छत पर बैठकर बहती गंगा को निहारना मुझे आज भी याद है।" भारत से उम्मीदों पर उन्होंने कहा, "भारत और नेपाल के रिश्ते बहुत पुराने हैं। सरकारें अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन जनता का रिश्ता बहुत गहरा है। मेरे बहुत से रिश्तेदार और परिचित भारत में हैं। अगर उन्हें कुछ होता है, तो हमें भी आंसू आते हैं। हमारे बीच गहरी आत्मीयता और प्रेम है। भारत ने हमेशा नेपाल की मदद की है। हम बेहद क़रीबी हैं। हां, जैसे रसोई में बर्तन एक साथ हों तो कभी-कभी आवाज़ होती है, वैसे ही छोटे-मोटे मतभेद हो सकते हैं, लेकिन रिश्ता मज़बूत है।
नेपाल के पूर्व राजा का संदेश
नेपाल में मचे बवाल के बीच पूर्व राजा ज्ञानेंद्र बीबी शाह का संदेश सामने आया है। रॉयल फेमिली के इंस्टाग्राम हैंडल के जरिए पूर्व राजा ने कहा कि, जो कुछ भी कल हुआ, वह अत्यंत दुखद था, जितने भी भाइयों को हमने खोया है, सभी के प्रति हार्दिक संवेदना है, जो भी इस निंदनीय घटना के जिम्मेदार हैं, उन सभी पर कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। किसी को भी बख्शा नहीं जाना चाहिए।
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