दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनावों में जमकर पैसा बहाया है। भाजपा ने लगभग 1494 करोड़ रुपए खर्च किए। केंद्र की सत्ता से 11 साल दूर रहने के बावजूद कांग्रेस ने भी चुनाव में खूब खर्चा किया। कांग्रेस ने कुल 620 करोड़ रुपए चुनावी समर बहाए।
भाजपा अकेले ही 44.56 प्रतिशत भागेदारी
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिपोर्ट (ADR) के अनुसार, कुल चुनावी खर्च में भाजपा की अकेले की हिस्सेदारी लगभग आधी है। भाजपा ने कुल चुनावी खर्च का 44.56 प्रतिशत अकेले खर्च किया, जबकि कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही। कांग्रेस ने 620 करोड़ रुपए खर्च किए, जो कुल खर्च का 18.5 प्रतिशत रहा। ADR ने कहा कि राजनीतिक दलों ने 3 हजार करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए है।
लोकसभा और चार विधानसभा चुनाव का ब्यौरा
ADR ने 16 मार्च से 6 जून 2024 के बीच लोकसभा और चार राज्य के विधानसभा चुनाव में हुए खर्चों का हिसाब बताया है। ADR ने कहा कि इन चुनावों में कुल 3352.81 करोड़ रुपए खर्च किए गए है। राष्ट्रीय दलों ने 2204 रुपए खर्च किए, जो कुल खर्च का 65.75 प्रतिशत है।
2 हजार करोड़ प्रचार-प्रसार खर्च
प्रचार-प्रसार पर सबसे अधिक रुपए खर्च किए गए। रिपोर्ट के मुताबिक प्रचार-प्रसार पर 2 हजार करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए गए है। सभी दलों ने प्रचार-प्रसार पर 2008 करोड़ रुपए खर्च किए जो कुल खर्च का 53 प्रतिशत है। यात्रा पर सभी दलों ने 795 करोड़ रुपए खर्च किए। स्टार प्रचारकों की यात्रा पर 765 करोड़ रुपए खर्च किए गए, जबकि कार्यकर्ताओं पर सिर्फ 30 करोड़ रुपए खर्च हुआ।
राष्ट्रीय दलों ने 6930.25 करोड़ रुपए जुटाए
ADR ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि, राष्ट्रीय दलों ने चुनाव के दौरान 6930.25 करोड़ रुपए जुटाए, जबकि क्षेत्रीय दलों ने 515.32 करोड़ रुपए जुटाए। उम्मीदवारों को नकद के रूप में 402 करोड़ रुपए मिले। उम्मीदवारों व पार्टियों ने वर्चुअल प्रचार के रूप में 132 करोड़ रुपए खर्च किए।
ये है चौंकाने वाली बात
ADR की रिपोर्ट में बताया गया कि 690 गैर-पहचान पार्टियों ने लोकसभा चुनाव में हिस्सा लिया था, लेकिन उनकी खर्च की जानकारी रिपोर्ट में शामिल नहीं है। NCP, CPI, JMM, शिवसेना (उबाठा) ने चुनाव लड़ने के बावजूद अपना खर्च शून्य दिखाया। अरुणाचल प्रदेश में एक, आंध्र प्रदेश में 74, ओडिशा में 35 और सिक्किम में दो दलों ने विधानसभा चुनाव लड़ा। ADR के विश्लेषण में इन दलों के व्यय विवरण शामिल नहीं किए गए।
खर्च का ब्यौरा
चुनाव आयोग को हर दल को खर्च का ब्योरा देना होता है। राजनीतिक पार्टियों को 90 दिनों के भीतर चुनावी खर्च का ब्यौरा देना होता है, लेकिन कई पार्टियों ने देरी से खर्च के ब्यौरे आयोग के पास जमा किए है। AAP ने अपनी रिपोर्ट 168 दिन बाद जमा की। भाजपा ने अपनी रिपोर्ट 154 दिन में जमा की। केवल कांग्रेस ने लोकसभा और राज्यसभा का ब्यौरा समय से दिया है।
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