मध्य प्रदेश। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के व्यापारियों से जोधपुर राजस्थान के जालसाजों ने एक करोड़ 58 लाख रुपए ठग लिए। पंकज मलंग ने पाल हाउस के पास फाफाडीह रमण मंदिर वार्ड की शिकायत पर मदनमहल पुलिस ने धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। प्रकरण में धोखाधड़ी के आरोपी लक्ष्मण नगर नंदरी रूरल जोधपुर ग्रामीण राजस्थान के रहने वाले भानू प्रताप सिंह और 933/5 गांधीपुरा बीजेएस कालोनी जोधपुर सिटी पश्चिम राजस्थान निवासी महेंद्र प्रताप सिंह की तलाश में पुलिस जुट गई है।
यह है पूरा मामला
दरअसल, मध्य प्रदेश के जबलपुर में मदनमहल थाना प्रभारी नीरज वर्मा ने बताया कि पंकज मलंग रायपुर में इलेक्ट्रानिक सामग्री का व्यापार करते हैं। धोखाधड़ी के आरोपी भानू प्रताप व महेंद्र प्रताप से उनकी पुरानी जान पहचान थी। दोनों पंकज के कुछ दोस्तों के साथ साझेदारी में व्यापार करते थे। कुछ साल पहले भानू प्रताप ने पंकज को बताया कि महेंद्र प्रताप के साथ मिलकर उसने व्यवसायिक कंपनी सांग्याजी इंटरप्राइजेस के अंतर्गत इलेक्ट्रानिक सामान की एक बड़ी कसाईनमेंट विदेश से भारत मंगवाई है। करीब एक करोड़ रुपए का निवेश कर चार करोड़ रुपए की आमदनी की जा सकती है। इस कारोबार के लिए उन्होंने जबलपुर को मुख्यालय बनाया है। भानू ने उसे लालच दी कि यदि वह एक करोड़ रुपए का निवेश करता है तो उसे चार गुना फायदा होगा। लालच में आकर पंकज ने अपने चचेरे भाई सतीश मलंग से इस संबंध में चर्चा की। जिसके बाद पंकज व सतीश जबलपुर पहुंचे। अग्रवाल कालोनी स्थित कार्यालय में भानू प्रताप व महेंद्र प्रताप से व्यवसायिक अनुबंध पत्र पर हस्ताक्षर किए। इस दौरान विजय नगर निवासी नारायण चक्रवर्ती और पद्मेश शुक्ला गवाह के तौर पर मौजूद थे और करण तलरेजा एवं रतन कुमार आसमानी को मलंग भाइयों ने साझेदार बनाया था। वर्ष 2017 में हुए अनुबंध के बाद इलेक्ट्रानिक सामान की खरीदी और उसे बेचकर होने वाले मुनाफे के नाम पर भानू व महेंद्र चचेरे भाइयों से रकम ऐंठते रहा। वर्ष 2018 तक एक करोड़ 58 लाख रुपए ऐंठने के बाद दोनों अग्रवाल कालोनी स्थित कार्यालय को बंद कर फरार हो गए है।
जानकारी के मुताबिक, पीडि़त चचेरे भाइयों को जालसाजों ने जानकारी दी थी कि वे विदेश से आधुनिक किस्म का कैमरा मंगवा रहे हैं। उस कैमरे से ली हुई तस्वीरों में किसी भी इंसान का ओहरा अलग नजर आता है। उन्होंने कुछ फोटो व पोस्टर भी चचेरे भाइयों को दिखाए थे। जिसके बारे में दावा किया था कि उसी कैमरे से तस्वीरें ली गई हैं। दोनों भाईयों ने सोचा कि ऐसा कैमरा बेचकर अच्छी खासी कमाई की जा सकेगी। रकम देने के बाद आरोपी जबलपुर से फरार हो गए और कैमरे की सप्लाई भी नहीं की।
चेक बाउंस
पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, जबलपुर से भागे जालसाजों की तलाश में चचेरे भाई जोधपुर पहुंचे। जहां दोनों को पकड़ लिया गया। अपनी जान बचाने के लिए उन्होंने चचेरे भाईयों को 59 लाख रुपए का बैंक चेक दिया था। 23 फरवरी 2021 को चेक बैंक में लगाया गया तो वह बाउंस हो गया। रकम वापस मांगने पर जान से मारने की धमकी दी जा रही है। शिकायत जांच पर भानू प्रताप व महेंद्र प्रताप के खिलाफ एक करोड़ 58 लाख की धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज कर दोनों की तलाश की जा रही है।
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