दंतेवाड़ा. छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के घोर नक्सल प्रभावित और अंतिम छोर के गांव मुलेर में गांववालों ने फोटो खिंचाने से साफ मना कर दिया. लिहाजा यहां सामाजिक आर्थिक सर्वे करने गई टीम को खाली हाथ लौटना पड़ा. अब ये नक्सलियों का खौफ या उनका फरमान ये स्पष्ट नहीं हुआ है. बहरहाल टीम की बैठक लेकर अब प्रशासनिक अफसर नए सिरे से रणनीति बनाने में जुट गए हैं.
बता दें कि छत्तीसगढ़ सरकार ने केंद्रीय व राज्य की योजनाओं के उचित क्रियान्वयन व हर जरूरतमंद को उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप लाभ दिलाने के उद्देश्य से सामाजिक आर्थिक सर्वे कराने का निर्णय लिया है. इसके तहत एक अप्रैल से सर्वे का काम प्रदेशभर में शुरू कर दिया गया है. यह 30 अप्रैल तक चलेगा. लेकिन, अब इसमें भी एक बड़ी बाधा आ गई है. दरअसल, दंतेवाड़ा जिले के सुदूर गांव मुलेर में गांव के सभी लोगों ने बाकी जानकारियां देने के लिए तो हामी भर दी, लेकिन परिवार का फोटो खिंचाने से साफ इनकार कर दिया.
गांव दंतेवाड़ा में, पुलिस सुकमा की
बता दें कि दंतेवाड़ा के जिस गांव में सर्वे टीम को फोटो खिंचाने से मना किया गया है वह सुकमा जिले से लगा और दंतेवाड़ा के अंतिम छोर का गांव है. खास ये कि राजस्व व प्रशासनिक जिले के रूप में यह दंतेवाड़ा में आता है. वहीं पुलिस जिला के रूप में यह सुकमा में आता है. यह ग्राम पंचायत नहाड़ी का आश्रित ग्राम है, जिसकी आबादी 112 है.
राशनकार्ड बनने के समय भी किया था मना
बता दें कि ये पहला मौका नहीं है, जब इस गांव के लोगों ने फोटो खिंचाने से मना किया हो. इससे पहले जब नया राशनकार्ड बनाया जाना था तब भी यहां टीम पहुंची थी. इस दौरान भी इस गांव के लोगों ने फोटो खिंचाने से साफ मना कर दिया था. वहीं अब इस समस्या को देखते हुए नोडल जनपद सीईओ कुआकोंडा मोहनीश देवांगन ने आर्थिक सर्वेक्षण में जुटे सुपरवाइजरों की मीटिंग बुलाई है.
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