बिलासपुर. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर करने वाले परिजनों ने पुलिस पर आरोप लगाया था कि वह उनकी गायब बेटी की तलाश नहीं कर रही है. कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने युवती को खोजकर त्रिपुरा से लाया जहां वह एक युवक के साथ थी. पुलिस ने युवक को भी साथ लाया था. अब हाईकोर्ट ने ही युवती को छूट दे दी है कि वह अपनी मर्जी से किसी के भी साथ जा सकती है.
बता दें कि बिलासपुर के सकरी थाना क्षेत्र की एक युवती कुछ दिनों से अपने घर से गायब हो गई थी. उसके परिजनों ने उसकी काफी तलाश की. इस बीच पता चला कि मोहल्ले में ही दूसरे राज्य से आकर रहने वाला एक युवक भी गायब है. उन्होंने सकरी थाने में रिपोर्ट लिखाई. परिजनों के मुताबिक पुलिस उनकी बेटी को खोजने में दिलचस्पी नहीं ले रही थी. लिहाजा उन्होंने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की. तब हाईकोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया था कि वह उनकी बेटी को खोजकर लाए और पेश करे. आखिरकार पुलिस ने तलाश की और त्रिपुरा में बांग्लादेश बॉर्डर के पास स्थित गांव से युवती और जिसके साथ वह थी, उस युवक को भी ले आई थी.
दोबारा सुनवाई में पलट गया मामला
परिजन की मांग पर ही हाईकोर्ट ने पुलिस को उनकी बेटी की तलाश करने को कहा था. उस दौरान पुलिस ने युवती और युवक दोनों को ही पेश किया था. वहीं अब जब मामले की सुनवाई हुई तो युवती ने युवक के साथ ही जाने की बात कही. तब कोर्ट ने युवती को छूट दे दी कि वह चाहे जिसके साथ भी जाना चाहे, वह अपनी मर्जी से जा सकती है.
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