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राजधानी में बेजुबानों पर बेरहमी: उबलते पानी से झुलसा दिए पालतू कुत्ते, पुलिस जांच में जुटी

 Newsbaji  |  Feb 24, 2026 05:40 PM  | 
Last Updated : Feb 24, 2026 05:40 PM
रायपुर में पशु-क्रूरता का मामला, जांच में जुटी पुलिस
रायपुर में पशु-क्रूरता का मामला, जांच में जुटी पुलिस

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में दो पालतू कुत्तों के साथ क्रूरता की घटना कोई “एक और खबर” नहीं है, यह हमारे समाज की संवेदनशीलता पर सीधा अभियोग है। जब बेजुबानों पर उबलता पानी डाला जाता है और उन्हें पीटा जाता है, तब सवाल केवल आरोपी का नहीं, उस सामाजिक चुप्पी का भी होता है जो ऐसी हिंसा को संभव बनाती है। कानून अपनी प्रक्रिया पूरी करेगा, पर क्या समाज अपनी जिम्मेदारी निभाएगा?

वीडियो से खुलासा, पड़ोसी ने उठाई आवाज
घटना तब सामने आई जब एक चिंतित पड़ोसी ने मारपीट का वीडियो साझा किया। फुटेज में दिखाई देने वाले दृश्य विचलित करने वाले बताए जा रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय पशु-कल्याण स्वयंसेवक वंचना लाबन, दीपेश मौर्य और उर्जा शृंगारपुरे मौके पर पहुंचे। उन्होंने कुत्तों की स्थिति देखकर गंभीर चिंता जताई। आरोप है कि एक कुत्ते को उबलते पानी से झुलसाया गया, जबकि दोनों के साथ मारपीट की गई।

PETA इंडिया ने की हस्तक्षेप की मांग
मामले की जानकारी मिलते ही People for the Ethical Treatment of Animals (PETA) इंडिया ने डीसीपी नॉर्थ, एसीपी और खमरडीह थाना पुलिस से संपर्क कर तत्काल कार्रवाई की मांग की। स्वयंसेवकों के सहयोग से भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 325 के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कराई गई है।

धारा 325 के तहत किसी पशु को अपंग करने या मारने को संज्ञेय अपराध माना गया है, जिसके लिए पांच वर्ष तक के कारावास, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।

खमरडीह पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरु कर दी है। PETA इंडिया ने पुलिस से अनुरोध किया है कि, पीड़ित कुत्तों को तत्काल सुरक्षित जब्ती में लेकर समुचित चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध कराया जाए, ताकि आगे किसी संभावित क्षति से बचाया जा सकें। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि, मामले की जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। 

रायपुर के लिए चेतावनी
राजधानी की यह घटना चेतावनी है कि, संवेदनहीनता सामान्य न बन जाए। कानून की धाराएं आवश्यक हैं, लेकिन सभ्यता का आधार करुणा है। जांच जारी है और अब नजर इस बात पर है कि, प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रिया कितनी तत्परता से आगे बढ़ती है। पर उससे भी बड़ा सवाल समाज के सामने है, क्या हम बेजुबानों की चीख को सुनेंगे, या इसे भी एक और खबर मानकर आगे बढ़ जाएंगे?
 

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