बीजापुर. छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के बीजापुर में कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी के काफिले पर हुए नक्सल हमले के मामले में बीजेपी नेता सवाल उठाते रहे हैं. साथ ही इस मामले में सीएम और गृहमंत्री के बयान में विरोधाभाष को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे थे. इस बीच नक्सलियों ने एक पत्र जारी किया है, जिसमें हमले की बात स्वीकार करने के साथ ही ये भी कहा गया है कि विधायक मंडावी उनके टारगेट में नहीं थे. इधर, अब पुलिस आगे की जांच में जुटी है.
बता दें कि घटना बीते मंगलवार 18 अप्रैल को तब हुई थी जब विधायक विक्रम मंडावी गंगालूर हाट बाजार में नुक्कड़ सभा से जिला मुख्यालय बीजापुर लौट रहे थे. मुख्यालय से करीब 7 किलोमीटर दूर पदेड़ा के नजदीक विधायक के काफिले को निशाना बनाया गया. वहीं काफिले में शामिल बीजापुर जिला पंचायत सदस्य पार्वती कश्यप के वाहन के टायर पर 2 गोली लगी थी. जबकि काफिले में शामिल सभी लोग सुरक्षित थे. वहीं नक्सलियों द्वारा जारी पत्र में हमले की पुष्टि की गई है.
टीसीओसी के तहत हमला
नक्सली आमतौर पर बड़ी घटनाओं को फरवरी से मई महीने के बीच में अंजाम देते हैं. इसे नक्सलियों ने टैक्टिकल काउंटर ऑफ ऑफेंसिव कैंपैन यानी टीसीओसी नाम दिया है. पत्र बस्तर डिवीजन कमेटी की ओर से जारी किया गया है और कहा गया है कि टीसीओसी के तहत उन्होंने प्रतिरोध स्वरूप इसे अंजाम दिया है. इसमें कोई राजनेता टारगेट में नहीं था. बल्कि केंद्र की बीजेपी और राज्य की कांग्रेस सरकार द्वारा नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान और उनकी हत्या के खिलाफ ये जवाबी कार्रवाई थी. अब देखने वाली बात ये है कि पुलिस और सरकार इस मामले में आगे क्या रणनीति अपनाती है.
टीसीओसी का असली मकसद कुछ और
बता दें कि नक्सली स्वयं इस पीरियड को टीसीओसी नाम देते हैं, जिसमें वे अपनी क्षमता का पूरा जोर लगाकर पुलिस, फोर्स, नेताओं व आम लोगों (पुलिस की मुखबीरी करने के शक पर) को टारगेट बनाकर उन पर हमला करते हैं. जबकि नक्सल मामलों के जानकारों का कहना है कि उनके इस अभियान की असली वजह ये है कि इस दौर में पतझड़ का मौसम चलते रहता है. गर्मी के दिन होते हैं और जंगल के अंदर दृश्यता बढ़ जाती है. ऐसे में उन्हें दूर से टारगेट बनाने और हमला करने में आसानी होती है. इस दौरान वे इन परिस्थितिजन्य कारणों से कहीं अधिक ताकतवर हो जाते हैं. इसीलिए जितनी भी बड़ी नक्सल वारदात हुई है वह इसी अवधि में हुई है.
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